आइज़ैक न्यूटन की जीवनी और उनके गति विषयक नियम | Sir Isaac Newton biography  

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न्यूटन का जन्म क्रिसमस के दिन पश्चिम लिंकोल्न्शिरे के एक वूल्स्थोर्प गाँव, इंग्लैंड में 25 दिसम्बर 1642 को हुआ था. न्यूटन के पिता की मृत्यु उनके जन्म लेने के दो महिना पहले ही हो चुकी थी. जब वो मात्र 3 साल के थे तब उनकी माँ ने दूसरी शादी कर ली थी और उनको छोड़ के चली गयी थी.

उसके बाद उनकी देख रेख उनकी दादी ने की थी, न्यूटन के सौतेले पिता की जब मृत्यु हो गयी, तब उनकी माँ वूल्स्थोर्पे लौट आई और उन्होंने पारिवारिक खेती में न्यूटन को मदद करने के लिए कहा, लेकिन न्यूटन को खेती की अपेक्षा पढना पसंद था.      

न्यूटन की शिक्षा

उनकी बुनियादी शिक्षा उनके गाँव के स्थानीय स्कूल में ही हुई थी. जब वो 12 साल के हुए तब वे इंग्लैंड के ग्रंथम में किंग स्कूल में पढने के लिए चले गए. वहाँ वे फार्मासिस्ट के घर में रहते थे जिसका नाम क्लार्क था. न्यूटन को क्लार्क की रासायनिक पुस्तकालय और प्रयोगशाला बहुत पसंद थी

19 वर्ष की अवस्था में उन्होंने इंग्लैण्ड के ट्रिनिटी कॉलेज में प्रवेश करके 1665 में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. वे मास्टर डिग्री भी प्राप्त करना चाहते थे, लेकिन प्लेग बीमारी की वजह से उन्हें वूल्स्थोर्पे वापस लौटना पड़ा था. जहाँ पर वे 1666 से 1667 तक रहे. यहाँ वे अपने बुनियादी प्रयोगों का प्रदर्शन करते रहे, साथ ही गुरुत्वाकर्षण के बारे में और प्रकाश के अध्ययन के बारे अपनी सोच पर काम करते रहे.

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न्यूटन के ने अपने करियर में बहुत से प्रयोग किये जोकि इस प्रकार है –

न्यूटन का प्रकाशिकी में प्रयोग

1670 से 1672 तक न्यूटन ने प्रकाशिकी के विषय पर व्याख्यान दिया था. न्यूटन का मुख्य आकर्षण प्रकाशिकी था, जिसमे उन्होंने प्रकाश के अपवर्तक की प्रभावशीलता की खोज की. उन्होंने एक यंत्र प्रदर्शित किया, जोकि लैंस के द्वारा प्रकाश की किरणों के झुकने से दूरस्थ वस्तुओं को देखने में सक्षम बनाता है.

प्रकाश की प्रकृति और उनके गुणों के बारे में खोज के आधार पर उन्होंने बताया की ‘श्वेत प्रकाश कई रंगों के प्रकाश का मिश्रण होता है’. इसको न्यूटन के रंगीन सिद्धांत के रूप में जाना जाता है. कई भौतिकवादी ने उनके प्रकाश के विपर्तन के लिए शुद्ध तरंग जैसे स्पष्टीकरण का समर्थन किया है.

1704 में उन्होंने ऑप्टिक्स प्रकाश के अतिसूक्ष्म कणों के अपने सिद्धांत को विस्तृत रूप में व्यख्यायित किया, जिसमे उन्होंने बताया की प्रकाश अति सूक्ष्म कणों से बना होता है जबकि द्रव साधारण कणों से बना होता है.

न्यूटन का बल में प्रयोग

1675 में कण के बीच आकर्षण और प्रतिकर्षण के रसायनीय विचारों के आधार पर न्यूटन ने पाया कि किसी भी कण के बीच बलों को संचारित करने के लिए ईश्वर की उपस्थिति हो सकती है. ऐसा विचार उन्होंने इसलिए किया था क्योकिं वो धार्मिक विचारों और ईश्वर की दिव्य शक्ति में विश्वास करते थे,

न्यूटन का यांत्रिकी और गुरुत्वाकर्षण में प्रयोग (Isaac Newton mechanics and gravitation theory)    

1679 में न्यूटन ने यांत्रिकी पर दुबारा से अपने प्रिन्सिपिया की दुसरे संस्करण में कार्य करते हुए व्याख्या की. प्रिन्सिपिया के लिए न्यूटन को अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई. प्रिन्सिपिया को प्रकाशित करवाने में एडमंड हेली ने वित्तीय मदद की और प्रोत्साहित भी किया. एक दिन न्यूटन पेड़ के नीचे बैठे हुए थे तभी एक सेब पेड़ से उनके ऊपर गिरा और वो उसके बारे में सोचने लगे, कि यह नीचे ही क्यों गिरा ये ऊपर भी तो जा सकता है बस यही से उनके वैज्ञानिक खोज और गुरुत्वाकर्षण सोच का जन्म हुआ

न्यूटन के अवार्ड और उपलब्धियां (Isaac Newton awards and accomplishments  )   

न्यूटन ने अपने जीवन में निम्न उपलब्धियों को हासिल किया.

  • न्यूटन ने 1665 में बिनोमिअल थ्योरम अर्थात द्विपद प्रमेय जिसको कैलकुलस कहा जाता है और पाई का मान का नया फार्मूला दिया था. ये न्यूटन की गणित की उपलब्धियों में शामिल है इसके अलावा उन्होंने गणित में जिस विधि की खोज की, आज हम उसे न्यूटन की विधि के नाम से जानते है. साथ ही उन्होंने परिमित अंतर का सिद्धांत, वर्गीकरण और इंडेक्स का उपयोग, जोकि ज्यामिति में समीकरणों को प्राप्त करने के लिए किया जाता है इनको परिभाषित किया था, इन सबकी खोज न्यूटन की उपलब्धियों में शुमार है.    
  • 1701 में न्यूटन इंग्लैंड के सांसद भी रहे. 1705 में संसदीय चुनाव के समय अपने राजनीतिक योगदान, टकसाल के मास्टर के रूप के लिए और उनके वैज्ञानिक कार्य के लिए क्वीन एनी ने न्यूटन को नाईट की उपाधि दी.  

न्यूटन का विवाद

कैलकुलस विवाद जो कि न्यूटन और गोटफ्राइड के बीच हुआ था. इसमे न्यूटन ने कहा था कि उन्होंने 1666 में कैलकुलस के एक फॉर्म पर काम करना शुरू किया, लेकिन इसका कही भी उस वर्ष के प्रकाशन में जिक्र नहीं है. जबकि गोटफ़्राईड ने 1674 में कैलकुलस के अपने संस्करण पर काम करना शुरू किया था, इसलिए उन्हें लग रहा था कि उन्होंने पहले इस फार्मूला को दिया है. हालाँकि बाद में न्यूटन ने 1687 की अपनी पुस्तक प्रिन्सिपिया के आर्टिकल 1 में ज्यामिति संकलन के रूप में कैलकुलस की व्याख्या की. 


न्यूटन का व्यक्तिगत जीवन और मृत्यु

न्यूटन अधिक धार्मिक प्रवृत्ति के थे, उन्होंने बाईबिल में भी साहित्यिक व्याख्या से सम्बंधित शोध लिखे. उनकी मृत्यु 20 मार्च 1727 को हुई थी. उन्हें वेस्टमिन्स्टर एब्बे में दफनाया गया था. न्यूटन की मृत्यु के बाद भी उनकी प्रसिद्धी में कोई कमी नहीं आई है आज भी वह एक प्रासंगिक वैज्ञानिक है. न्यूटन ने कभी शादी नहीं की.      

न्यूटन के अनमोल वचन (Isaac Newton quotes) 

  1. यदि मै ये बोलू की मैंने दूसरों की अपेक्षा किसी भी चीज को अधिक देखा है तो इसका अर्थ होता है, कि मैंने उन लोगों के कंधे पर सवार होकर चीजो को ज्यादा देखा और समझा है.
  2. मुझे नहीं पता कि दुनिया मुझे किस तरह या किस रूप में दिखेगी, लेकिन मैं अपने आप को एक ऐसे बच्चे की तरह देखते हुए महसूस करता हूँ, जो समुन्द्र के किनारे पर खेल रहा है और अपने आपको बदल रहा है और वह एक सुन्दर सा शक्ल धारण कर लेता है. लेकिन मै ऐसा सोचता हूँ कि अभी भी मुझसे महान सचाई कोसों दूर है.
  3. हम अपने लिए बहुत अधिक दीवारों का निर्माण तो कर लेते है, लेकिन उन्हें मजबूत करने के लिए अभी भी पुल की संख्या बहुत कम है.
  4. मेरे व्यवहार और किसी भी कार्य को करने के लिए मेरा आवेदन ही मेरी सफलता है, मेरे अन्दर कोई बड़ी शक्ति नहीं है शक्तिया मुझे समान्य ही मिली है.
  5. चीजो की अधिक सुविधा या उसकी बहुलता में या अमीरी की विलासिता में सचाई कभी भी नहीं पाई जा सकती, सच्चाई हमेशा सादगी में ही पाई जा सकती है.      

न्यूटन के गति विषयक नियम

न्यूटन का प्रथम नियम या जड़त्व का नियम या गैलेलियो नियम

यदि कोई वस्तु विरामावस्था में या स्थिर है या फिर एक समान गति से चल रही है तो उसकी इस गति में या अवस्था में परिवर्तन तभी आयेगा, जब इस पर कोई बाह्य अर्थात बाहरी बल लगाया जायेगा. अगर बल ना लगाया जाये तो कोई परिवर्तन नहीं आएगा इस नियम को न्यूटन का प्रथम नियम कहा जाता है.

इसको उदाहरण के साथ निम्न रूप से वर्णित किया गया है –

  1. अगर रुकी हुई गाड़ी अचानक से चलने लगे तो उसमे सवार यात्री पीछे की ओर झुक जाता है, तथा चलती हुई गाड़ी अचानक से रुक पड़े तो यात्री आगे की ओर झुक जाता है.
  2. अगर पेड़ को जोर से हिलाएं तो उसके फल नीचे की तरफ गिरते है.

न्यूटन का दूसरा नियम

इस नियम के अनुसार किसी वस्तु पर कार्य करने वाले बल का मान वस्तु के द्रव्यमान और वस्तु में उत्पन्न त्वरण के गुणनफल के समानुपाती होता है. इस नियम को संवेग परिवर्तन का नियम कहते है.

इस नियम को निम्न उदाहरण के माध्यम से समझा जा सकता है जो निम्नलिखित है –

  1. क्रिकेट खिलाडी गेंद को कैच करते वक्त हाथ को थोडा पीछे खीच लेते है जिस वजह से उन्हें चोट लगने की सम्भावना कम रहती है. अगर वो ऐसा न करे तो दुसरे नियम के अनुसार जितनी तेजी में गेंद आएगी अगर हाथ को आगे बढ़ा दे तो चोट दुगुनी लग सकती है.

न्यूटन का तीसरा नियम

इस नियम के अनुसार प्रत्येक क्रिया के विपरीत या बराबर एक प्रतिक्रिया होती है. अर्थात अगर कोई वस्तु जिस पर बल लगता है, तो उसके विपरीत वह वस्तु भी विपरीत बल लगाती है. इसी को क्रिया और प्रतिक्रिया कहा जाता है. तथा इस नियम को भी क्रिया प्रतिक्रिया का नियम कहा जाता है.

तृतीय नियम को समझने के लिए निम्नलिखित उदहारण दिए जा रहे है –

  1. जब भी बन्दुक से गोली चलती है तो वो पीछे की तरफ धक्का देती है.
  2. कुए से पानी को भरते वक्त व्यक्ति का पीछे की तरफ गिरना. 



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