आज गणेश जयंती पर बन रहा है ये शुभ योग, जानिए विघ्नहर्ता श्री गणेश की पूजा विधि 


Ganesh Jayanti 2022 : माघ माह में भगवान गणेश को समर्पित दो महत्वपूर्ण व्रत रखे जाएंगे। इनमें से एक सकट चौथ है और दूसरा गणेश जयंती. इस बार बन रहे हैं दो खास योग

 हिंदू कैलेंडर के 11वां माह यानि माघ (Magha Month) का हिंदू धर्म (Hindusim) में विशेष महत्व माना गया है। हिंदू धर्म ग्रंथ यानि पुराणों में माघ के महीने का जिक्र मिलता है जिसमें इस माह को मोक्ष का महीना माना गया है।

दरअसल मान्यता के अनुसार इस महीने में गंगा-यमुना आदि पवित्र नदियों में स्नान सभी पापों का नाश करता है। इसके अलावा हिंदू कैलेंडर के 11वां माह यानि माघ जो मुख्य रूप से भगवान श्रीहरि विष्णु के साथ ही सूर्यदेव की पूजा का महीना माना जाता है के दौरान भगवान गणेश को समर्पित दो बहुत महत्वपूर्ण उपवास रखे जाते हैं।

इनमें जहां एक सकट चौथ है वहीं दूसरा गणेश जयंती का पर्व है। ये मुख्य रूप से भारत के उत्तरी राज्यों में मनाई जाती है। माना जाता है कि सभी दुखों और परेशानियों को दूर करने के लिए सकट चौथ का व्रत मनाया जाता है, जबकि भगवान गणेश के जन्म के उपलक्ष्य में गणेश जयंती को मनाया जाता है।

गणेश जयंती की तिथि और मुहूर्त
पंडित सुनील शर्मा के मुताबिक पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि जो साल 2022 (संवत्सर 2078) में शुक्रवार, 04 फरवरी को सुबह 04 बजकर 38 मिनट से शुरू होगी और शनिवार, 05 फरवरी को सुबह 03 बजकर 47 मिनट पर इस तिथि का समापन होगा।

इस बार 04 फरवरी को मनाई जाने वाली गणेश जयंती के लिए सुबह 11 बजकर 30 मिनट से दोपहर 01 बजकर 41 मिनट तक का समय गणपति बप्पा की पूजा के लिए शुभ है, यानि पूजा के लिए कुल 02 घंटा 11 मिनट का समय मिलेगा।

गणेश जयंती पर इस बार विशेष संयोग
पंडित शर्मा के अनुसार साल 2022 में गणेश जयंती पर बहुत ही शुभ संयोग बन रहे हैं। दरअसल इस बार गणेश जयंती रवि योग और शिव योग में मनाई जाएगी। इसके तहत जहां 04 फरवरी को शाम 07 बजकर 10 मिनट तक शिव योग रहेगा, वहीं रवि योग सुबह 07 बजकर 08 मिनट से शुरू होकर दोपहर 03 बजकर 58 मिनट तक रहेगा।

गणेश जयंती की खासियत
हिंदू शास्त्रों के अनुसार माता पार्वती ने जिस दिन उबटन से श्री गणेश की रचना करने के पश्चात उनमें प्राण प्रतिष्ठा की थी। वह दिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी थी।

ऐसे में जो कोई भी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करता है, उसे दिव्य सुख की प्राप्ति होती है साथ ही उसकी समस्त मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं।

गणेश जयंती का पूजा विधि 
गणेश जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि सहित नित्य कर्मों के पश्चात पूजा स्थल की सफाई करें। और फिर मंदिर या पूजा स्थल को फूलों और रोशनी से सजाएं। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाने के पश्चात उस पर भगवान गणेश की मूर्ति रखें।

फिर गणेश जी को सिंदूर और दूर्वा अर्पित करते हुए 21 लडडुओं का भोग लगाए। इनमें से 5 लड्डू श्री गणेश जी को अर्पित करने के बाद बाकी लड्डुओं को गरीबों या ब्राह्मणों को बांट दें। फिर गणेश जी की कथा, चालीसा और आरती करके उनका आशीर्वाद लें।

गणेश जयंती 2022 पूजा

आज प्रात: स्नान के बाद गणेश जी की मूर्ति के साथ माता लक्ष्मी की भी मूर्ति भी स्थापित करें. माता लक्ष्मी ने जब माता पार्वती की सहमति से गणेश जी को अपना दत्तक पुत्र बनाया था, तब उन्होंने गणेश जी को वरदान दिया था कि जो कोई भी उनके साथ गणपति की पूजा करेगा, उस स्थान पर वह वास करेंगी.

गणेश एवं लक्ष्मी आरती
इसके बाद गणेश चालीसा एवं कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें. इसके पश्चात माता लक्ष्मी एवं गणेश जी की आरती कपूर या घी के दीपक से करें. पूजा के समय गणेश जी के जन्म की कथा का श्रवण करें.

इन वस्तुओं का करें दान
सफेद वस्त्र, कपूर, घी, चावल, इत्र, श्रृंगार सामग्री, मिश्री, दही आदि का दान करें. शुक्रवार को इन वस्तुओं का दान करने से सुख सुविधाओं में वृद्धि होती है. शुक्र ग्रह भी मजबूत होता है.

मंदिर में गणेश जी की कितनी मूर्ति हो?

घर के मंदिर में गणेश जी की मूर्ति रखना बेहद शुभ माना गया है. लेकिन इन्हें रखने से पहले कुछ जरूरी नियमों बताए गए हैं. ऐसा माना जाता है कि गणेश जी की मूर्ति घर में विषम संख्या जैसे 3,5,7 या 9 आदि में नहीं होनी चाहिए. इसकी जगह आप गणपति की 2,4,6 आदि मूर्ति रख सकते हैं. आप घर में सुपारी को गणेश जी बनाकर भी उनकी पूजा कर सकते हैं. 

घर में किस गणपति की पूजा करना उत्तम

हर कोई अपनी आस्था और मनोकामना के आधार पर ही गणपति के स्वरूप की पूजा करता है. लेकिन घर में गणपति विराजमान करते समय ध्यान रखें कि कभी भी खड़े हुए गणपति न रखें. घर में हमेशा बैठे हुए गणपति की पूजा शुभ मानी जाती है. इसी प्रकार अलग-अलग मनोकामना के लिए अलग-अलग गणपति की पूजा करने का विधान है. 

श्वेतार्क गणपति- आक के पौधे की जड़ से बने श्वेतार्क गणपति की पूजा करने से किसी भी प्रकार के टोने-टोटके, नजर आदि दोष का भय नहीं खत्म हो जाता है. 

पारद के गणेश- पारद से बने गणेश जी की पूजा भी अत्यंत शुभ मानी गई है. मान्यता है कि पारद गणेश की पूजा करने से जीवन में सुखों की प्राप्ति होती है. और जीवन में कभी किसी प्रकार की कोई बाधा नहीं आती.

चांदी के गणपति- शास्त्रों के अनुसार चांदी से बने गणपति की प्रतिमा की पूजा करने से धन-धान्य और सुख-संपत्ति की प्राप्ति होती है और साधक को जीवन में किसी चीज की कमी नहीं रहती. 

चंदन के गणपति- चंदन के गणपति पूजने से साधक के घर में प्रेम और सामंजस्य बना रहता है. साथ ही व्यक्ति का मन निर्मल और पवित्र बनता है. 

मूंगे के गणपति- मान्यता है कि सिंदूरी मूंगे से बने गणेश जी की पूजा से ​ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं का भय दूर होता है. साथ ही, साधक गणपति की कृपा से निर्भय होकर सुखी जीवन जीता है.

पन्ना के गणेश- पन्ना रत्न से बने गणपति की साधना से बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद प्राप्त होता है. वहीं, परीक्षा और प्रतियोगिता में सफलता मिलती है. सुखों की प्राप्ति होती है.

मंदिर में गणेश जी की कितनी मूर्ति हो?

घर के मंदिर में गणेश जी की मूर्ति रखना बेहद शुभ माना गया है. लेकिन इन्हें रखने से पहले कुछ जरूरी नियमों बताए गए हैं. ऐसा माना जाता है कि गणेश जी की मूर्ति घर में विषम संख्या जैसे 3,5,7 या 9 आदि में नहीं होनी चाहिए. इसकी जगह आप गणपति की 2,4,6 आदि मूर्ति रख सकते हैं. आप घर में सुपारी को गणेश जी बनाकर भी उनकी पूजा कर सकते हैं. 

घर में किस गणपति की पूजा करना उत्तम

हर कोई अपनी आस्था और मनोकामना के आधार पर ही गणपति के स्वरूप की पूजा करता है. लेकिन घर में गणपति विराजमान करते समय ध्यान रखें कि कभी भी खड़े हुए गणपति न रखें. घर में हमेशा बैठे हुए गणपति की पूजा शुभ मानी जाती है. इसी प्रकार अलग-अलग मनोकामना के लिए अलग-अलग गणपति की पूजा करने का विधान है. 

पूजा के समय निम्न मंत्र का उच्चारण करें

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारु भक्षणम्ं. उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥




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