कैपिटल गेन्स टैक्स क्या है? What is Capital Gains tax 

कैपिटल गेन टैक्स क्या है?

Capital Gain का हिन्दी में मतलब होता है पूंजी लाभ। यानी कि किसी पूंजी से होने वाला फायदा। ये पूंजी आपका घर, संपत्ति, जेवर, कार, शेयर, बॉन्ड आदि कुछ भी हो सकता है। ऐसी किसी भी चीज को खरीदने के बाद बेचने से जो लाभ होता है, उसे Capital Gain कहते हैं। इस Capital Gain को सरकार आपकी Income का हिस्सा मानती हैऔर इस पर Tax भी लेती है। निष्कर्ष के रूप में हम कह सकते हैं कि किसी पूंजी यानी संपत्ति को बेचने पर होने वाले लाभ में जो Tax लगता है उसे Capital Gain Tax कहते हैं।

Note: पूंजी और सामान्य वस्तुओं में एक विशिष्ट अंतर होता है। वस्तुएं जिस दाम पर आती हैं, थोडे़ Profit के साथ बेच दी जाती हैं। पूंजी एक प्रकार की टिकाऊ संपत्ति होती है। इसमें समय बीतने के साथ खुद का दाम बढ़ाने की प्रवृत्ति होती है। अक्सर इनके खरीद दाम (Purchasing Price) और बेचने के दाम (Selling Price) में काफी अंतर पाया जाता है। कुछ मामलों में यह घट भी सकता है, लेकिन ऐसा प्राय: कम होता है।

कैपिटल गेन और बिजनेस इनकम में अंतर होता है

Business Income और Capital Gain में फर्क पैसा लगाने के मकसद में छिपा है। अगर आप किसी प्रकार की Property को खरीदने-बेचने का कारोबार ही करते हैं। आप वर्ष भर में कई बार उनकी खरीद-बेच करते हैं। ऐसी Property पूंजी यानी Capital की कैटेगरी में नहीं आएगी। उससे होने वाली Income भी Business Income में गिनी जाएगी। लेकिन, अगर आपने Property को Investment या अपने उपयोग के उद्देश्य से खरीदी है तो ये Property आपकी पूंजी के रूप में गिनी जाएगी। इनसे होने वाली आमदनी Capital Gain के रूप में गिनी जाएंगी। 

अंतर के उदाहरण

  • एक घर जब Builder खरीदता है तो उसका Original Purpose उसे खरीदना और बेचना होता है। उसके लिए ये रोज का काम होता है। Builder के लिए घर के बेचने से होने वाला फायदा Business Income की कैटेगरी में आएगा। इसके उलट एक सामान्य व्यक्ति जो अपना कोई अन्य कारोबार या नौकरी आदि कर कर रहा है। ऐसा व्यक्ति जब घर खरीदता है तो वह उसे रहने या किराये आदि पर देने के उद्देश्य से लेता है। अगर किसी कारण से उसे बेचना पड़ा तो यह Capital Gain की श्रेणी में आएगा।
  • इसी तरह Jewellery के मामले में भी होगा। एक सराफा कारोबारी जब Jewellery को खरीदता—बेचता है तो उसकी इनकम Business Income की श्रेणी में आएगी। एक सामान्य व्यक्ति जब अपनी घरेलू Jewellery को बेचेगा तो उससे होने वाला प्रॉफिट Capital Gain की कैटेगरी में आएगा। क्योंकि Jewellery खरीदना-बेचना उसका बिजनेस नहीं है।
  • यही स्थिति Shares, Bonds वगैरह के साथ भी मान सकते हैं। कोई शेयर कारोबारी कंपनियों के Share खरीदने-बेचने का व्यवसाय करता है। उसकी आमदनी Business Income में गिनी जाएगी। एक सामान्य व्यक्ति जब शेयरों को Investment के हिसाब से खरीदता है, तो उससे होने वाली इनकम Capital Gain में गिनी जाएगी।

कैपिटल गेन के प्रकार | Types of Capital Gains

पूंजी को बेचने से मिली फायदे की रकम पर जो Capital Gain Tax लगता है वह टैक्स भी अलग-अलग तरह की पूंजी पर अलग-अलग तरीके से लगता है। जो पूंजी हम ज्यादा समय (Long Term) के लिए अपने पास रखकर बेचते हैं, उस पर अलग तरीके से Tax की गणना होती है। इसी तरह जो पूंजी हम कम समय (Short Term) के लिए अपने पास रखकर बेचते हैं, उस पर अलग तरीके से Tax की गणना होती है।

  • Short Term Capital Gain 
  • long Term Capital Gain

ये long Term (लंबी अवधि)  और Short Term (अल्प अवधि)  तय करने की अवधि सबके लिए एक जैसी नहीं होती है। किसी पूंजी के लिए long Term 3 साल का माना जाता है तो किसी के लिए 2 साल तो किसी के लिए 1 साल भी। ये Term कैसे तय होते हैं, उन पर Tax कैसे लगता है, आइए जानते हैं।

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स

  • अगर कोई Property आप 3 साल से कम अवधि तक अपने पास रखकर बेच डालते हैं तो उससे होने वाला Profit Short term Capital Gain में गिना जाता है। इस पर लगने वाला टैक्स Short term Capital Gains Tax कहा जाता है।
  • Financial Year 2017-18 से अचल संपत्तियों (Immovable Property) के 2 साल के भीतर हुए सौदों को Short term की सीमा में कर दिया गया है। अगर आपने कोई अचल संपत्ति खरीदकर 2 साल के पहले बेचा तो फायदा Short term Capital Gain में माना जाएगा।
  • Shares के मामले में 1 साल के भीतर बेचने पर उससे होने वाला फायदा Short term Capital Gain माना जाएगा। इस पर लगने वाला टैक्स Short term Capital Gains Tax  कहा जाएगा।

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स की दर

Short Term Capital Gain पर टैक्स के लिए सरकार कोई अलग से दर घोषित नहीं करती। इसे अन्य आमदनियों की तरह आपकी कुल आमदनी में जोड़ दिया जाता है। फिर कुल आमदनी में से जितनी आपकी Taxable Income होती है, उस पर Tax Slab के अनुसार टैक्स भरना पड़ता है।

लांग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स

  • अगर कोई Property आप अपने पास कम से कम 3 साल तक अपने पास रखकर बेचते हैं तो उससे होने वाला मुनाफा Long Term Capital Gain में गिना जाता है। इस पर लगने वाला Long Term Capital Gain Tax कहा जाता है।
  • अचल संपत्तियों (Immovable Properties) जैसे जमीन, Building, घर आदि के मामले में Long Term Capital Gain की अवधि सरकार ने वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2 साल कर दी है। जबकि चल संपत्तियों (Movable Properties) जैसे Jewellery, बॉन्ड, Debt Oriented Mutual Funds आदि के मामले में यह 3 साल ही है।
  • Shares के मामले में सिर्फ एक साल की अवधि को ही Long Term  में रखा गया है। मतलब यह कि अगर आप Share खरीदने के 12 महीने के बाद बेचते हैं तो उससे होने वाला फायदा Long Term Capital Gain माना जाएगा। इस पर लगने वाला टैक्स Long Term Capital Gain Tax कहा जाएगा।

लांग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स की दर| Rate Of Long Term Capital Gains Tax

सामान्यतया long-term capital gains पर 20 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है। कुछ विशेष मामलों में यह 10 प्रतिशत भी हो सकता है (Finance Act, 2016 में संशोधन के मुताबिक)।

कैपिटल गेन्स पर टैक्स की गणना कैसे होती है?

Capital Gains पर टैक्स की गणना के पहले आपको ये जानना होगा कि आपको कुलCapital Gains यानी फायदा हुआ कितना है। सामान्य वस्तुओं की बिक्री में फायदे की गणना करना बहुत आसान होता है। जितने की खरीदी है और जितने में बेची है, उनका difference निकाल लिया और फायदा पता चल गया। 

  • Property बेचने से वास्तव में हमारी कितनी income बढ़ी किसी प्रापर्टी को बेचने में जो आपको रकम मिलती है,अक्सर वो पूरा का पूरा आपकी Income में बढोतरी नहीं होती। Property को बेचने की प्रक्रिया में पहले ही कुछ खर्चे हो चुके होते हैं। जैसे कि advertisement, एजेंट को commission आदि। इस तरह आपकी income में वास्तव में जो बढोतरी हुई है, वह इन खर्चों को निकालने के बाद पता चलती है। तो सबसे पहले आप यह रकम निकाल लीजिए।
  • Property को खरीदने में लगी रकम आज के हिसाब से कितनी हुईजब आपने Property खरीदी थी, उस समय उसके लिए कितनी रकम दी थी। उसको खरीदने में रजिस्ट्री, stamp duty, कमीशन आदि में कितना खर्च हुआ था। सब कुछ जोडकर पूरा खर्च निकाल लेते हैं। इस टोटल खर्च को Indexation करके आज की तारीख में उसका कितना value होता, इसे पता कर लेते हैं। अगर Property में बाद में कुछ लागत लगाई है तो उसे भी Indexation करके आज के हिसाब से उसका मूल्य निकाल लेते हैं। ये सब जोडकर हम property पर पर लगी अपनी कुल लागत निकाल लेते हैं।

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