चाँद का पहला यात्री – आर्मस्ट्रॉन्ग 

चन्द्रमा ,तारो और अन्तरिक्ष की दुनियां में बचपन से ही आकर्षण रखने वाले नील आर्मस्ट्रांग चाँद पर कदम रखने वाले पहले इंसान थे. ये अंतरिक्ष वैज्ञानिक होने के साथ साथ इंजीनयर, नौसेना विमान चालक, टेस्ट पायलट और यूनिवर्सिटी प्रोफेसर भी थे. अपने जीवन काल में आर्मस्ट्रांग ने कुल 900 एयर फ्लाईट टेस्ट किये.

पूरा नामनील एल्डन आर्मस्ट्रांग
जन्म5 अगस्त 1930, वेपकॉनेटा
मृत्युअगस्त 25, 2012 (उम्र 82)
शिक्षाबी॰एस, एम॰एस॰
प्रसिद्धि कारणप्रथम चन्द्र्यात्री
पुरस्कारप्रेजिडेंटल मैडल ऑफ फ्रीडम, कॉंग्रेसनल स्पेस मैडल ऑफ ऑनर
नागरिकताअमेरिकी

नील आर्मस्ट्रांग अंतरिक्ष वैज्ञानिक- पहले चाँद पर जाना सपनों की बात थी, लेकिन मेहनत और संघर्ष से सपने सच हो जाते हैं. चाँद पर जाने की कल्पना को नील आर्मस्ट्रांग ने सच कर दिखाया.उन्होंने जुलाई 1969 में चाँद पर अपने कदम रख दिए. नील आर्मस्ट्रांग एक अमेरिकी यात्री थे. उनका जन्म 5 अगस्त 1930 को आग्लैज देश के ओहियो के वापकोनेता में हुआ था.

नील आर्मस्ट्रांग बहुमुखी प्रतिभा के स्वामी थे. वे एक एरोस्पेस इंजीनियर, नौसेना विमान चालक, टेस्ट पायलट और युनिवर्सिटी के प्रोफेसर थे.अंतरिक्ष यात्रा पर जाने से पहले वे अमेरिका के नेवी ऑफिसर थे.उन्होंने कोरियाई युद्ध में अपनी सेवाए दी थी.

युद्ध के बाद उन्होंने पुरदुर युनिवर्सिटी से बैचलर की उपाधि प्राप्त की और हाई स्पीड फ्लाईट स्टेशन नेशनल एडवाइजरी कमेटी फॉर एयरोनोटिक्स यानी कि नासा के टेस्ट पायलट के पद पर रहकर अपनी सेवाए दी.

सन 1962 ई में नील आर्मस्ट्रांग नासा के एस्ट्रोनॉट कोपर्स में शामिल हुए, 8 मार्च 1966 को कमांड पायलट के रूप में उन्होंने अपनी पहली स्पेस फ्लाईट उड़ाई थी.

उस समय वे नासा के पहले अंतरिक्ष यात्री बने थे. पहले उन्होंने डेविड स्कोट के साथ उड़ान भरी, लेकिन उनकी यह उड़ान बाद में रद्द कर दी. इसके बाद आर्मस्ट्रांग की दूसरी और अंतिम स्पेस फ्लाईट कमांडर के रूप में अपोलो 11 थी.

पहली फ्लाईट जुलाई 1969 में चाँद पर उतरी थी. पर वर्ष 1969 में आर्मस्ट्रांग को चाँद पर पहुचने के लिए अनेक मुश्किलों और कठिन परिस्थतियों का सामना करना पड़ा था. उनके साथ नासा के पहले चन्द्रयान का हिस्सा बनने वाले माइकल कालिंस और एडविन ई बज्ज भी थे.

इन तीनो की तिकड़ी 16 जुलाई 1969 को अंतरिक्ष पहुची थी. मिशन कमांडर आर्मस्ट्रांग ने 20 जुलाई 1969 को चन्द्रमा की सतह पर चलकर देखा भी था. उनके सहकर्मी कॉलिन्स कमांड मोड्यूल में ही बैठे रहे थे.

आर्मस्ट्रांग ने चंद्रमा मोड्यूल से बाहर निकलकर कहा था, इंसान का यह छोटा सा कदम मानव जाति के लिए एक बहुत बड़ी छलांग हैं. यह बात सही भी थी. उसके बाद से अनेक देशों के अंतरिक्ष यात्री चाँद पर अपने कदम रख चुके हैं.

नील आर्मस्ट्रांग के साथ ही कालिंस और एलिड्रिन को अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने प्रेसिडेशियल मेडल ऑफ फ्रीडम अवार्ड से सम्मानित किया.

82 साल की उम्रः में 25 अगस्त 2012 को चन्द्रमा के पहले अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग ने अंतिम सांस ली. आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जब तक सूरज चाँद रहेगा, तब तब नील आर्मस्ट्रांग को चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में याद किया जाता रहेगा.

पहला जेट विमान उड़ाया –

किशोरावस्था में ही उन्होंने बहोत से ईगल स्काउट अवार्ड अर्जित किये और साथ ही उन्हें सिल्वर बफैलो अवार्ड भी मिला था। नील गणित और विज्ञान में काफी तेज थे खगोल विज्ञान और ब्रह्मांड विज्ञान में उनकी ख़ास दिलचस्पी थी | सोलह साल की उम्र में उन्होंने अपना छात्र पायलट लाइसेंस हासिल कर लिया था। सन 1951 में एक बार युद्ध के दौरान वे उत्तर कोरिया के उपर उड़ रहे थे। 

अपने F9F पेंथर जेट विमान में उड़ते हुए उन्होंने देखा कि उत्तरी कोरियाई सैनिक अपने भोर के रोजमर्रा के काम में लगे हुए है। वे चाहते तो उन्हें अपनी मशीन गन से उड़ा सकते थे , लेकिन उन्होंने ट्रिगर से उंगली हठा ली और आगे निकल गये | वे ऐसे निहत्थे लोगो पर कैसे हमला कर सकते थे ,जो अपना बचाव भी नही कर सकते थे। 

निल आर्मस्ट्रोंग से इंदिरा गाँधी की मुलाकात –

दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को संसद भवन कार्यालय स्थित इंदिरा गांधी के कक्ष में ले जाने वाले नटवर ने याद किया कि उस समय तत्कालीन अमेरिकी राजदूत भी उपस्थित थे। उन्होंने बताया, जब फोटाग्राफर दोनों अंतरिक्ष यात्रियों की इंदिरा गांधी के साथ तस्वीरें खींचकर बाहर चले गए तो वहां अजीब-सी खामोशी छा गई ।

इंदिरा द्वारा बातचीत का संकेत दिए जाने पर नटवर ने कहा , मिस्टर आर्मस्ट्रांग, आपकी यह जानने में दिलचस्पी होगी कि प्रधानमंत्री सुबह 4.30 बजे तक जागती रही थी। वह चंद्रमा पर आपके उतरने के क्षण से चूकना नहीं चाहती थीं। नटवर ने याद किया कि इस पर आर्मस्ट्रांग ने कहा,  प्रधानमंत्री, आपको हुई असुविधा के लिए  खेद व्यक्त करता हूं।

अपोलो 11 मिशन और नील आर्मस्ट्रांग

21 जुलाई, 1969 को नील आर्मस्ट्रांग ने अपने सहयोगियों के साथ चंद्रमा पर कदम रखा, यह सफलता की कहानी महज एक अंतरीक्ष यात्री की सफल उड़ान की नहीं थी, बल्कि लाखों वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत और करोड़ों लोगों के आस और विश्वास से भी जुड़ी थी.

16 जुलाई 1969 को अपोलो-11 को पृथ्वी से रवाना किया गया तथा यह 21 जुलाई को 2:56 बजे चन्द्रमा पर सकुशल पहुंचा. महज इन चार दिनों के पीछे का यत्न और उसकी कहानी बड़ी रोचक और जानने योग्य हैं.

सोवियत संघ के यूरी गगारिन ने 1961 में अंतरीक्ष यात्रा के साथ ही अब अमेरिका और नासा के समक्ष प्रतिष्ठा बचाने का प्रश्न खड़ा हो गया था. सोवियत की इस सफलता के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी ने यह घोषणा कर दी कि वे अब चाँद पर मानव को भेजकर उन्हें सकुशल पृथ्वी पर लेकर आएगे.

नासा के करीब पांच लाख वैज्ञानिक दस वर्षों के लिए इस प्रोजेक्ट पर लगाये गये और चौबीसों घंटे कड़ी परिश्रम की गई. वैज्ञानिकों के सामने पहली चुनौती एक ऐसा अंतरिक्ष यान और राकेट तैयार करना था जो चाँद तक जाकर पुनः लौट आने में सक्षम हो.

करीब 6 वर्षों के परिश्रम के बाद लूनर मॉड्यूल बना, तथा बेहद शक्तिशाली इंजन कबशन भी तैयार हो गया. इसकी गुणवत्ता के परीक्षण के लिए लगभग सात बार इसका सफल परीक्षण किया गया.

नासा ने जैमिनी प्रोजेक्ट 1961 में लौंच किया तथा 1966 तक करीब दस बार मनुष्यों को पृथ्वी की कक्षा तक भेजकर वापिस लाया गया. इस दौरान 27 जनवरी, 1967 को अपोलो-1 लोंच किया गया मगर यान में आग लगने के कारण तीन वैज्ञानिक मारे गये तथा यह पहला प्रयास विफल हो गया.

नासा ने 1966 आते आते राकेट और यान तो तैयार कर लिया मगर अब उनके सामने समस्या यह थी कि आखिर इस अभियान पर किन व्यक्तियों को भेजा जाए. क्योंकि ऐसे साहसिक अभियानों में अनुभवी पायलटों का चुना जाना बेहद जरूरी था.

चन्द्रमा पर आर्मस्ट्रांग

20 जुलाई 1969 की रात को ठीक आठ बजे अपोलो चाँद की सतह पर सफलतापुर्वक उतर गया. इससे पूर्व अपोलो 11 के हिस्से कोलंबिया को ईगल से अलग किया गया. ईगल पर नील आर्मस्‍ट्रांग और बज आल्ड्रिन ईगल सवार हुए तथा माइक कोलिंस कोलम्बिया पर ही रुके.

चाँद पर लैंडिंग के कई घंटे बाद 21 जुलाई को 2:56 बजे नील आर्मस्‍ट्रांग ने पहले मानव के रूप में चाँद पर कदम रखा उनके कुछ देर बाद आल्ड्रिन चाँद की सतह पर आए. दोनों ने करीब 21 घंटे और 31 मिनट का समय यहाँ व्यतीत किया. इस दौरान दोनों ने चाँद की मिट्टी के नमूनों को एकत्र भी किया.

धरती पर लौटते समय उनका यान प्रशांत महासागर में गिरा परन्तु सकुशल इनको निकाला गया तथा अगले 21 दिनों तक क्वारंटीन भी रखा गया ताकि उन पर किसी बाहरी सक्रमण के प्रभाव की जाँच की जा सके.

नील आर्मस्ट्रांग और बज्ज एल्ड्रिन ने चन्द्रमा की जमीन पर पूरे 2.30 घण्टे बिताए। दोनों ने चन्द्रमा पर रहकर वहां की मिट्टी के सैंपल एकत्र किए। नील ने अपने साथी के साथ मिलकर चांद की जमीन के कई इमेजेज भी लिए थे। 24 जुलाई 1969 को तीनों अंतरिक्ष यात्रियों ने हवाई द्वीप के पेसिफिक वेस्ट ओसियन पर वापसी की लैंडिंग की थी।

नील आर्मस्ट्रांग से जुड़े कुछ तथ्य:

  • इनका जन्म 5 अगस्त 1930 को हुआ था, नील के पिता का नाम स्टीफेन आर्मस्ट्रांग था और माँ का वायला लुई एंजेल थीं.
  • नील के पिता एक सरकारी ओडिटर थे, इनका बचपन पिता के तबादलों के चलते कई शहरों में व्यतीत हुआ था.
  • आर्मस्ट्रांग जब पांच बरस के थे उस समय उन्होंने पहली एरोप्लेन की सवारी 1936 में की थी.
  • अपने जीवनकाल में इन्होने अनेकों तरह की उड़ानों में भाग लिया, चार हजार किमी घंटा की रफ्तार से उड़ने वाले एक्स 15 से लेकर कई रोकेट और ग्लाइर भी शामिल थे.
  • 20 जुलाई, 1969 को मानव इतिहास का पहला दिन था जब नील ने चन्द्रमा पर कदम रखा था.
  • नील ने अमेरिकी सेनाओं के लिए भी काम किया था तथा कुछ युद्धों में भी भागीदारी निभाई.

वह अंतरिक्ष यात्री कैसे बने?

कॉलेज से स्नातक होने के बाद, आर्मस्ट्रांग एक परीक्षण पायलट बन गए| उन्होंने सभी प्रकार के प्रायोगिक विमानों को उड़ाया, ताकि वे यह देख सकें कि वे कितनी अच्छी तरह से उड़ सकते हैं|

और वह इस तरह से विमान उड़ाने में परिपक्व हो गए| हालांकि यह एक खतरनाक काम था, लेकिन यह बहुत रोमांचक था। उन्होंने अपने करियर के दौरान 200 से अधिक विभिन्न प्रकार के विमान उड़ाए थे।

आर्मस्ट्रांग ने 1962 में अंतरिक्ष यात्री बनने के लिए नासा में अप्लाई किया और उन्हें नासा की ओर से चुन लिया गया| इसके बाद उन्हें कई शारीरिक परीक्षणों और परीक्षाओं से गुजरना पड़ा और वह उन सारी परीक्षाओं में सफल होते गए|


Neil Armstrong की कमांड पायलट सफर –

एक नौसेना उड़ानकर्ता के रूप में उनकी पहली तैनाती फ्लीट एयरक्राफ्ट सर्विस स्क्वार्डन 7 में सान डियागो में हुई। युद्ध के दौरान उड़ान का पहला मौका उन्हें कोरियाई युद्ध के दौरान मिला जब 29 अगस्त 1951 को उन्होंने इसमें उड़ान भरी। यह एक तस्वीर लेने के लिए उड़ान भरी थी। पांच दिन बाद, 3 सितंबर को उन्होंने पहली सशस्त्र उड़ान भरी।

आर्मस्ट्रांग ने कोरिया युद्ध में 78 मिशनों के दौरान उड़ान भरी और 121 घंटे हवा में गुजारे। इस युद्ध के दौरान उन्हें पहले 20 मिशनों के लिये ‘एयर मेडल’, अगली 20 के लिये ‘गोल्ड स्टार’ और कोरियन सर्विस मेडल मिला। आर्मस्ट्रांग ने 22 की उम्र में नौसेना छोड़ी और संयुक्त राज्य नौसेना रिजर्व में 23 अगस्त 1952 को लेफ्टिनेंट (जूनियर ग्रेड) बने और अक्टूबर 1960 में यहां से सेवानिवृत्त हुए।

हृदय की बीमारी –

हृदय की बीमारी के चलते आर्मस्ट्रांग 7 अगस्त 2012 को बाईपास सर्जरी से गुजरे, रिपोर्ट के मुताबिक़ वे तेजी से ठीक हो रहे थे, लेकिन फिर अचानक कुछ जटिलतायें उत्पन्न हुईं और 25 अगस्त 2012 को सिनसिनाती, ओहायो में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु के बाद, व्हाईट हाउस द्वारा जारी एक सन्देश में उन्हें अपने समय के ही नहीं अपितु सार्वकालिक महान अमेरिकी नायकों में से एक बताया गया।

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