पीवी सिंधु: जानिए बैडिमिंटन की उस महिला खिलाड़ी के बारे में, जिसने चुनौतियों को साथी बनाकर हासिल किए कई बड़े मुकाम 

बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु को हाल ही में टोक्यो ओलंपिक में देखा गया था। पीवी सिंधु ने अपने शानदार प्रदर्शन से दो बार ओलंपिक मेडल हासिल किया। वहीं हाल ही में ब्रेक के बाद वापसी करने वाली सिंधु डेनमार्क ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट में शामिल हुईं। सिंधु डेनमार्क में हो रहे बैडमिंटन टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचीं।

हालांकि, कोरिया की अन सियंग से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। सिंधु भले ही इस टूर्नामेंट में अपने नाम जीत दर्ज नहीं करा सकीं लेकिन इस धुरंधर बैडमिंटन खिलाड़ी की उपलब्धियां बहुत ज्यादा हैं। पीवी सिंधु के नाम दो ओलंपिक में एक के बाद एक पदक जीतने वाली पहली महिला का खिताब है

पीवी सिंधु का परिचय

पीवी सिंधु का जन्म 5 जुलाई, 1995 में आंध्र प्रदेश के हैदराबाद में हुआ था। पीवी सिंधु का पूरा नाम पुसरला वेंकट सिंधु है। सिंधु के माता पिता दोनों ही राष्ट्रीय स्तर के वॉलीबॉल खिलाड़ी थे। पीवी सिंधु के पिता का नाम पीवी रमना है, जिन्होंने 1986 के सियोल एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता था। सिंधु का मां पी विजया भी प्रोफेशनल वाॅलीबाॅल प्लेयर थीं। यही वजह है कि बचपन से ही खेल के प्रति सिंधु का जुड़ाव रहा। सिंधु की एक बहन भी हैं, जिनका नाम पीवी दिव्या है।

पीवी सिंधु की शिक्षा

पीवी सिंधु ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा औक्सिलियम हाई स्कूल से पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए पीवी सिंधु ने ने सेंट एंस कॉलेज फॉर वुमेन, मेह्दीपटनम से एमबीए की पढ़ाई की। 

पीवी सिंधु ने क्यों चुना बैडमिंटन?

सिंधु ने आठ साल की उम्र से बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। दरअसल माता पिता दोनों वॉलीबॉल खिलाड़ी थे लेकिन सिंधु का लगाव बैडमिंटन की ओर था। वह पुलेला गोपीचंद की सफलता से प्रभावित थीं। पुलेला गोपीचंद ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियन थे। 

पीवी सिंधु की बैडमिंटन ट्रेनिंग

सिंधु ने बैडमिंटन की ट्रेनिंग सिकंदराबाद में इंडियन रेल्वे इंस्टिट्यूट ऑफ़ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड टेलीकम्यूनिकेशन में मेहबूब अली की देखरेख में शुरू की। बाद में पुलेला गोपीचंद की बैडमिंटन अकादमी में दाखिला लिया। कोचिंग कैंप सिंधु के घर से 56 किलोमीटर दूर था, लेकिन वह रोज समय पर ट्रेनिंग ग्राउंड में पहुंचती थीं। 

पीवी सिंधु का करियर 

सिंधु ने आठ साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। महबूब अली के मार्गदर्शन में, उन्होंने सिकंदराबाद में भारतीय रेलवे सिग्नल इंजीनियरिंग और दूरसंचार संस्थान के बैडमिंटन कोर्ट में बैडमिंटन की मूल बातें सीखना शुरू किया। वह खेल सीखने और अभ्यास करने के लिए अपने आवास से बैडमिंटन कोर्ट तक हर दिन 56 किमी की दूरी तय करती थी। पीवी सिंधु गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी में शामिल हुईं और 10 साल की श्रेणी के तहत कई खिताब जीते। अंबुजा सीमेंट अखिल भारतीय रैंकिंग में, उन्होंने युगल और एकल वर्ग में 5वीं सर्वो अखिल भारतीय रैंकिंग चैंपियनशिप जीती।

  1. 13 साल से कम उम्र की श्रेणी में, सिंधु ने पांडिचेरी में सब-जूनियर्स में खिताब जीता, कृष्णा खेतान ऑल इंडिया टूर्नामेंट में युगल खिताब, आईओसी ऑल इंडिया रैंकिंग, सब-जूनियर नेशनल और पुणे में अखिल भारतीय रैंकिंग। 14 वर्ष से कम आयु वर्ग में, उसने भारत में 51वें राष्ट्रीय राज्य खेलों में स्वर्ण पदक जीता।
  2. 14 साल की उम्र में पीवी सिंधु ने अंतरराष्ट्रीय सर्किट में प्रवेश किया। उन्होंने कोलंबो में 2009 की सब-जूनियर एशियाई बैडमिंटन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। सिंधु ने 2010 ईरान फज्र इंटरनेशनल बैडमिंटन चैलेंज में रजत पदक जीता था। उसने मैक्सिको में 2010 बीडब्ल्यूएफ विश्व जूनियर चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई लेकिन चीनी प्रतिद्वंद्वी से हार गई।
  3. 2011 में सिंधु ने जून में मालदीव इंटरनेशनल चैलेंज और जुलाई में इंडोनेशिया इंटरनेशनल चैलेंज जीता। डच ओपन में, उसने फाइनल में जगह बनाई लेकिन मैच हार गई। स्विस इंटरनेशनल में, सिंधु ने कैरोला बॉट को हराकर फाइनल जीता। उन्होंने 2011 में इंडिया इंटरनेशनल बैडमिंटन इवेंट जीता।

पीवी सिंधु के बारे में तथ्य: पीवी सिंधु ने इस साल टोक्यो 2020 ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन किया है और भारत की पहली महिला डबल ओलंपिक पदक विजेता बनीं। उन्होंने टोक्यो ओलंपिक 2020 में महिला एकल में तीसरे स्थान के प्ले-ऑफ में दुनिया की 9वें नंबर की चीन की ही बिंग जिओ पर सीधे गेम में जीत के बाद भारत के लिए कांस्य पदक जीता। 

ओलंपिक – 1 अगस्त 2021

  • टोक्यो 2020 ओलंपिक में उनके प्रदर्शन से उत्साहित राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने निरंतरता, समर्पण और उत्कृष्टता का एक नया पैमाना स्थापित करने के लिए उनकी सराहना की। प्रधान मंत्री मोदी ने भी सिंधु को उनकी ओलंपिक जीत पर बधाई दी और उन्हें भारत के सबसे उत्कृष्ट ओलंपियनों में से एक के रूप में सम्मानित किया।
  • इससे पहले, उन्होंने डेनमार्क की मिया ब्लिचफेल्ट को 2-0 से हराया और टोक्यो 2020 ओलंपिक बैडमिंटन में महिला एकल के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई।
  • वह 2016 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के फाइनल में पहुंचने वाली भारत की पहली बैडमिंटन खिलाड़ी थीं और उन्हें फोर्ब्स में 2018 और 2019 में सबसे अधिक भुगतान पाने वाली महिला एथलीटों के रूप में भी सूचीबद्ध किया गया था।

पीवी सिंधु: जन्म, प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

पीवी सिंधु का जन्म 5 जुलाई 1995 को हैदराबाद में पीवी रमना (पिता) और पी विजया (मां) के घर हुआ था। उनके माता-पिता राष्ट्रीय स्तर पर वॉलीबॉल खिलाड़ी रहे हैं। सिंधु के पिता 1986 के सियोल एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली टीम के सदस्य थे। उन्हें खेल में उनके योगदान के लिए वर्ष 2000 में अर्जुन पुरस्कार मिला।

पीवी सिंधु ने अपनी स्कूली शिक्षा औक्सिलियम हाई स्कूल, हैदराबाद और सेंट एन कॉलेज फॉर विमेन, हैदराबाद में की। पुलेला गोपीचंद, 2001 ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियन बैडमिंटन को अपने करियर के रूप में चुनने के लिए सिंधु की प्रेरणा बनीं।

पीवी सिंधु की नौकरी

सिंधु भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के हैदराबाद कार्यालय में सहायक खेल प्रबंधक के रूप में साल 2013 जुलाई से कार्यरत थीं। रियो ओलंपिक में पदक हासिल करने के बाद बीपीसीएल ने उप खेल प्रबंधक के तौर पर उनका प्रमोशन किया। इसके अलावा सिंधु को ब्रिजस्टोन इंडिया का पहला ब्रांड एंबेसडर भी नियुक्त किया गया था। पीवी सिंधु घरेलू प्रीमियर बैडमिंटन लीग में हैदराबाद हंटर्स की कप्तान हैं।

पीवी सिंधु की उपलब्धि

साल 2016 में हुए रियो ओलंपिक में पीवी सिंधु ने रजत पदक जीता था। इस बार टोक्यो ओलंपिक 2020 में सिंधु ने कांस्य पदक हासिल किया। इस तरह सिंधु ने लगातार दो ओलंपिक में पदक जीतने वाली एकमात्र महिला खिलाड़ी का खिताब हासिल कर लिया। सिंधु 2018 राष्ट्रमंडल खेलों के उद्घाटन समारोह में भारत की ध्वजवाहक रह चुकी हैं।

पीवी सिंधु को पुरस्कार

-पीवी सिंधु को साल 2020 में भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार- पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है। इसके पहले साल 2015 में सिंधु को पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। 

-उन्हें सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड मिल चुका है। साल 2013 में पीवी सिंधु को अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया था। 

पीवी सिंधु: अवार्ड

  • जनवरी 2020 में, पीवी सिंधु को भारत में सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार- पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
  • मार्च 2015 में, सिंधु को भारत में चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार- पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
  • अगस्त 2016 में, उन्हें भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान- राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित किया गया।
  • सितंबर 2013 में पीवी सिंधु को खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा गया।
  • उन्हें फिक्की द्वारा ब्रेकथ्रू स्पोर्ट्सपर्सन ऑफ द ईयर 2014 का खिताब दिया गया था।
  • 2015 मकाऊ ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप में अपनी जीत के लिए उन्हें बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया से US$14,000 मिले।
  • उन्हें 2016 मलेशिया मास्टर्स में अपनी जीत के लिए बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया से 7,000 अमेरिकी डॉलर मिले।

पी. वी. सिंधु से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियाँ

  • क्या पी. वी. सिंधु धूम्रपान करती हैं ? नहीं
  • क्या पी. वी. सिंधु शराब पीती हैं ? ज्ञात नहीं
  • उन्होंने सिकंदराबाद में भारतीय रेलवे संस्थान से मेहबूब अली के मार्गदर्शन पर बैटमिंटन की बारीकियां सीखी। बाद में वह पुलेला गोपीचंद की बैडमिंटन अकादमी में शामिल हो गई, और उनसे परीक्षण लेने लग गई। उल्लेखनीय रूप से, गोपीचंद इंडियन बैडमिंटन टीम के मुख्य कोच भी हैं।
  • सिंधु एक मेहनती खिलाड़ी हैं। वह अपने दिनचर्या का सख्ती से पालन करती हैं और वह हर सुबह 4:15 पर बैडमिंटन का अभ्यास शुरू कर देती हैं।
  • वर्ष 2014 में, एनडीटीवी द्वारा उन्हें “Indian of the year” घोषित किया गया था।
  • सिंधु के माता-पिता पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी हैं।
  • वर्ष 2000 में, उनके पिता पी. वी. रमण को राष्ट्रीय वॉलीबॉल के प्रति अपने योगदान के लिए अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • वर्ष 2012 में, ली निंग चीन मास्टर्स सुपर सीरीज प्रतियोगिता में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा, जब उन्होंने वर्ष 2012 के लंदन ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता चीन की ली जुइरेई (Li Xuerui) को हरा दिया।
  • 1 अगस्त 2021 को, वह भारत की सबसे सुशोभित महिला खिलाड़ी बन गईं, जब उन्होंने 2020 टोक्यो ओलंपिक में महिला एकल कांस्य पदक जीतने के लिए चीन की हे बिंग जिओ को हराया; 2016 के रियो ओलंपिक में रजत पदक जीतने के बाद यह पी. वी. सिंधु का दूसरा ओलंपिक पदक था।
  • 30 मार्च 2015 को, उन्हें भारत के चौथे उच्चतम नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया गया।    

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