सुंदर पिचाई की जीवनी

सुंदर पिचाई एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जो कि इस वक्त गूगल इंक कंपनी के चीफ एक्सिक्विटिव ऑफिसर के रुप में कार्य कर रहे. भारत में जन्मे पिचाई एक दशक से अधिक समय से इस कंपनी से जुड़े हुए हैं और इस कंपनी के साथ जुड़कर इन्होंने कई उपलब्धियां प्राप्त की हैं, साथ ही में इन्होंने इस कंपनी को अपना कई सारा योगदान भी दिया है.

सुन्दर पिचाई के बारे में व्यक्तिगत जानकारी 

पूरा नाम: पिचाई सुंदरराजन

जन्म तिथि: 10 जून, 1972 (आयु 47)

जन्म स्थान: मदुरै, तमिलनाडु, भारत

पिता: रघुनाथ पिचाई

माँ: लक्ष्मी पिचाई

पत्नी: अंजलि पिचाई

बच्चे: 2 (काव्या पिचाई, किरण पिचाई)

राष्ट्रीयता: अमेरिकी, (भारत का जन्म)

ऊँचाई: 1.80 मीटर

सुंदर पिचाई की शिक्षा:

सुंदर पिचाई की स्कूली शिक्षा: उन्होंने जवाहर विद्यालय, अशोक नगर, चेन्नई से स्कूली शिक्षा पूरी की और वनवाणी मैट्रिकुलेशन हायर सेकेंडरी स्कूल से बारहवीं कक्षा पूरी की थी.

सुंदर पिचाई के परिवार और जन्म के बारे में संक्षिप्त जानकारी

जन्मदिन (Birthday)12 जुलाई, 1972
जन्म स्थान (Birth Place)मदुरै, तमिलनाडु, भारत
पिता का नाम (Father’s Name)रघुनाथ पिचाई
माता का नाम (Mother’s Name)लक्ष्मी पिचाई
भाई का नाम (Brother’s Name)एक है, नाम की जानकारी नहीं
पत्नी का नाम (Wife’s Name)अंजलि पिचाई
बच्चों का नाम (Children’s Name)किरण पिचाई और काव्या पिचाई

सुंदर का जन्म तमिलनाडु के मदुरै शहर में हुआ था और इसी राज्य में इनका शुरुआती जीवन बीता हुआ है. इनके पिता एक विद्युत इंजीनियर हुआ करते थे और इनकी मां बतौर स्टेनोग्राफर के तौर पर कार्य किया करती थी. इन्होने अंजलि नाम की लड़की से विवाह किया था और इनके कुल दो बच्चे हैं.

सुंदर पिचाई की शिक्षा

  • भारत का नाम विश्व में रोशन कर रहें इस भारतीय इंजीनियर ने अपनी 10 वीं कक्षा तक की पढ़ाई जवाहर विद्यालय से की हुई है, जबकि अपनी 12 वीं कक्षा की पढ़ाई इन्होंने वाना वानी स्कूल से हासिल कर रखी है.
  • इन्होंने मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विषय में डिग्री भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर से प्राप्त की हुई है.
  • अपनी डिग्री हासिल करने के बाद ये अमेरिका चले गए थे और यहां पर जाकर इन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया था और इस विश्वविद्यालय से भौतिक विज्ञान और इंजीनियरिंग के विषय में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री प्राप्त की थी. इसके अलावा इन्होंने व्हार्टन स्कूल ऑफ पेंसिल्वेनिया से भी एमबीए की पढ़ाई कर रखी है.

 सुंदर पिचाई की निजी जिंदगी से जुड़ी जानकारी-

  • सुंदर पिचाई को नंबर काफी जल्दी से याद हो जाते हैं और इसलिए ये एक बार जो फोन नंबर डायल करते हैं, वो इन्हें एकदम से याद हो जाता है.
  • इनकी काबिलियत को देखते हुए माइक्रोसॉफ्ट जैसी बहुराष्ट्रीय दिग्गज कंपनियों ने इन्हें नौकरी का प्रस्ताव दिए था, लेकिन इन्होंने गूगल कंपनी के साथ ही बने रहने का फैसला लिया था और इनका प्रस्ताव का ठुकरा दिया था.
  • सुंदर पिचाई बेहद ही साधारण परिवार से नाता रखते थे और इनके बचपन के दिनों में इनके घर में ना ही टी.वी हुआ करता था और ना ही गाड़ी हुआ करती थी.

सुंदर पिचाई का करियर

  • गूगल का हिस्सा बनने से पहले सुंदर पिचाई मैकिंसे एंड कंपनी में कार्य किया करते थे और इन्होने कुछ सालों तक इस कंपनी में कार्य किया. इसके बाद इन्होंने गूगल कंपनी को ज्वाइन कर लिया था. जिस वक्त इन्होंने इस कंपनी को ज्वाइन किया था, उस वक्त ये इस कंपनी की एक छोटी सी टीम का हिस्सा हुआ करते थे, जो कि गूगल सर्च टूलबार पर कार्य किया करती थी.
  • गूगल क्रोम, ब्राउजर को बनाने के पीछे इनकी अहम भूमिका रही थी और काफी कम समय में क्रोम दुनिया का नंबर 1 ब्राउजर बन गया था. जिसके बाद साल 2008 को इनको इस कंपनी के उत्पाद विकास विभाग का उपाध्यक्ष बना दिया गया था और साल 2012 में ये क्रोम और ऐप्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बन गए थे.
  • इनके द्वारा किए गए कार्यों को देखते हुए इन्हे गूगल का सीईओ बना दिया गया था और इस कंपनी के सबसे महत्वपूर्ण उत्पादों को बनाने के पीछे इन्ही का ही हाथ है.

सुंदर पिचाई के साथ जुड़े विवाद

कर्मचारी को निकालने का विवाद

सुंदर पिचाई काफी साफ छवि वाले व्यक्ति हैं और इनके साथ किसी भी तरह का विवाद नहीं जुड़ा हुआ है. हालांकि साल 2018 में इन्होंने अपनी कंपनी से जेम्स डेमोर को उनके द्वारा लिखे गए एक मेमो के चलते बाहर निकाल दिया था. इस मेमो में जेम्स ने लिखा था कि  गूगल कंपनी महिलाओं को कम  मौका देती है और इस कंपनी में काफी कम संख्या में महिलाएं काम कर रही हैं. वहीं जेम्स को निकालने के बाद सुंदर पिचाई ने अपनी सफाई देते हुए कहा था, कि जेम्स को निकालने का निर्णय सही था.

सुंदर पिचाई के जीवन से जुड़ी जानकारी 

  • साल 2011 में सुंदर पिचाई ने ट्विटर कंपनी को ज्वाइन करने का फैसला कर लिया था, लेकिन गूगल कंपनी ने इन्हें अधिक पैसे देकर ट्विटर कंपनी में जाने से रोक लिया था.
  • सुंदर पिचाई और उनकी पत्नी एक साथ ही आईआईटी कॉलेज में पढ़ाई किया करते थे और इसी दौरान इन्होंने एक दूसरे को डेट करना शुरू कर दिया था.
  • समय समय पर सुंदर पिचाई अपने कॉलेज, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर के छात्रों के साथ स्काइप के जरिए बात करते रहते हैं और इनके साथ अपने अनुभव को बांटते हैं.

सुंदर पिचाई की कुल आय और इनकम

फरवरी 2016 में, इन्हें गूगल की होल्डिंग कंपनी अल्फाबेट के 273,328 शेयरों से सम्मानित किया गया, जिसके साथ ही इनकी कुल संपत्ति में काफी वृद्धि हो गई थी. वहीं 2016 में इन्होने गूगल कंपनी को अपनी सेवा देकर 1,280 करोड़ रुपए कमाए थे. जबकि साल 2015 में इन्हें जब  उत्पाद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर पदोन्नत किया गया तो इन्हें मुआवजे (compensation) के रुपए में लगभग 600 करोड़ रुपए मिले थे.

गूगल कंपनी में सीईओ का पद हासिल करने के लिए इन्होंने कई सालों तक कड़ी मेहनत की है और साथ में ही नए नए सुझाव देकर इस कंपनी को नई बुलंदियां पर पहुंचाया है.

सुन्दर पिचाई का करियर

सुंदर पिचाई ने IIT खड़गपुर से मैटलर्जिकल इंजीनियरिंग में B.Tech पूरा किया और एक छात्रवृत्ति के लिए चुने गए जिसके तहत उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, यूएसए से मटेरियल साइंस और इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ़ साइंस की डिग्री हासिल की थी.

उन्होंने सिलिकॉन वैली, संयुक्त राज्य अमेरिका में एक सेमीकंडक्टर निर्माता कंपनी (एप्लाइड मैटेरियल्स) में एक इंजीनियर और प्रोडक्ट मैनेजर के रूप में अपना करियर शुरू किया था.

सुंदर ने 2002 में व्हार्टन से एमबीए पूरा किया और एक सलाहकार के रूप में मैकिन्से एंड कंपनी में शामिल हो गए. आखिरकार, उन्होंने 2004 में गूगल ज्वाइन किया था.

सुंदर पिचाई की प्रमुख सफलता

सुंदर पिचाई ने गूगल के के सह-संस्थापकों, सर्गेई ब्रिन और लैरी पेज को आश्वस्त किया कि गूगल स्वयं का एक ऐसा ब्राउज़र लांच करे जो कि यूजर फ्रेंडली हो. सुन्दर के प्रयासों के कारण अंततः 2008 में गूगल के ब्राउज़र ‘क्रोम’ को लांच कर दिया गया था. 

यह ब्राउज़र बहुत सफल साबित हुआ और फ़ायरफ़ॉक्स और इंटरनेट एक्सप्लोरर जैसे प्रतियोगियों को पीछे छोड़ते हुए, क्रोम दुनिया में नंबर 1 ब्राउज़र बन गया. पिचाई की इस पहल ने उन्हें  इंटरनेशनल लेवल पर प्रसिद्द और वे गूगल में एक जाना-माना नाम हो गये थे.

फाइनली गूगल ज्वाइन करने के 11 सालों के बाद सुन्दर पिचाई को अगस्त 10, 2015 के दिन गूगल का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बना दिया गया था.

सुन्दर पिचाई अल्फाबेट इंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO)

अल्फाबेट इंक का गठन 2015 में गूगल की मूल कंपनी के रूप में किया गया था. फरवरी 2013 में सुंदर पिचाई को गूगल की होल्डिंग कंपनी अल्फाबेट के 273,328 शेयर दिए गए. आखिरकार 3 दिसंबर, 2019 को वे अल्फाबेट इंक के सीईओ बन गए.

तो, निष्कर्ष में, यह कहा जा सकता है कि सुंदर पिचाई एक महान आविष्कारक और एक परफेक्ट तकनीशियन हैं. हम सभी भारतीयों को उनकी सफलता पर गर्व है.

सुंदर पिचाई का टेक्नोलॉजी से प्यार

जब सुंदर यंग थे, उन्हें अपनी मां की ब्लड टेस्ट रिपोर्ट लेने के लिए अक्सर हॉस्पिटल जाना पड़ता था. उन्हें वहाँ पहुंचने में बस से एक घंटा बीस मिनट लगता था. हॉस्पिटल पहुंचने के बाद, वह एक और घंटा लाइन  में इंतजार करते थे. पिचाई ने पहली बार 12 साल की उम्र में टेलीफोन देखा था, जब उनके माता पिता  ने एक रोटेटरी टेलीफोन खरीदा था.

इसे खरीदने के बाद सुंदर इस फोन से हॉस्पिटल कॉल कर पाते थे. इस पुराने किस्म के फ़ोन से कॉल करने में अब भी कम से कम 10 मिनट लगते थे. जब भी वह फोन करते, उन्हें अक्सर एक जैसा ही जवाब मिलता था कि रिपोर्ट अभी तैयार नहीं हैं.


सुंदर पिचाई की मिडल क्लास लाइफ

सुंदर पिचाई एक साधारण बैकग्राउंड से आए. जब उन्हें अमेरिका में पढ़ने के लिए स्कॉलरशिप मिली तो उनके पिता ने एक साल की अपनी सैलरी उनके फ्लाइट की टिकट पर खर्च कर दी. यह पहला मौका था जब पिचाई ने फ्लाइट में सफर किया था. उन्हें वह एक्सपीरियंस अच्छी तरह से याद हैं. उन दिनों घर में फोन कॉल करना काफी महंगा होता  था.

सुंदर पिचाई की क्रिटिसिज़्म और बैकलैश 

2018 दिसंबर में, यूनाइटेड स्टेट्स हाउस ज्यूडिशियरी कमिटी ने कई मामलों में Google से पूछताछ की. कमिटी का मानना था कि Google ने अपने प्लेटफार्म को पॉलिटिक्स के लिए गलत यूज़ किया था और अपने यूज़र्स के कॉन्फिडेंशियल और सेंसिटिव डेटा चुरा लिए थे. Google पर चाइना में सेंसर किया गया सर्च ऐप का प्लान बनाने का भी दोष लगा. सुंदर पिचाई ने इन सबसे इंकार किया और कहा कि गूगल और उनके एम्प्लॉई किसी भी तरह के सर्च रिजल्ट पर कोई असर नहीं डाल कर सकते हैं और, Google का कोई  पॉलिटिकल इंटरेस्ट नहीं था, इसलिए उनके यूज़र्स को किसी भी पॉलिटिकल एजेंडे के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया.


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