सुपरस्टार” राजेश खन्ना की कहानी  

राजेश खन्ना एक भारतीय अभिनेता, फिल्म निर्माता और राजनीतिज्ञ थे, जो हिंदी सिनेमा में उनके काम के लिए जाने जाते हैं। उन्हें “प्रथम सुपरस्टार” और भारतीय सिनेमा के “मूल सुपरस्टार” के रूप में जाना जाता हैं। उन्होंने 1969 से 1971 की अवधि में लगातार 15 अलग अलग हिट फिल्मों में अभिनय किया, और एक कभी न टूटने वाला रिकॉर्ड बनाया।

उन्होंने 1966 में फ़िल्म “आखरी खत” के साथ अपने कैरियर की शुरुआत की। अपने कैरियर के माध्यम से वह 168 से अधिक फीचर फिल्मों और 12 लघु फिल्मों में दिखाई दिए। उन्हें तीन बार फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवार्ड और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (हिंदी) के लिए चार बार बीएफजेए पुरस्कार भी मिला । बादमें 1991 में उन्हें फिल्मफेयर स्पेशल अवार्ड से सम्मानित किया गया और 2005 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्राप्त हुआ। 1970 से 1987 तक वह सबसे महंगे भारतीय अभिनेता थे।

शिक्षा :

अपनी प्राथमिक शिक्षा सेंट सेबेस्टियन्स गोन हाई स्कूल से की और पढाई के ही दौरान इनकी दोस्ती  रवि कपूर से हुयी जिन्हें सदाबहार जितेन्द्र के नाम से जानते हैं. दोनों ने साथ ही पढाई की.

पुरस्कार:

  • 1971 में, फिल्म सच्चा झूठा के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता अवॉर्ड से सम्मानित
  • 1972 में, फिल्म आनंद के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता अवॉर्ड से सम्मानित
  • 1973 में, फिल्म अनुराग के लिए फिल्मफेयर विशेष अतिथि अभिनेता अवॉर्ड से सम्मानित
  • 1975 में,फिल्म अविष्कार के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता अवॉर्ड से सम्मानित
  • 1991 में, भारतीय फिल्म उद्योग में 25 वर्ष पूरे होने के लिए फिल्मफेयर स्पेशल अवॉर्ड से सम्मानित
  • 2005 में, फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (स्वर्ण जयंती समारोह) से सम्मानित
  • 1972 में, फिल्म आनंद में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए बीएफजेए पुरस्कार से सम्मानित
  • 1973 में, फिल्म बावर्ची में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए बीएफजेए पुरस्कार से सम्मानित
  • 1974 में, फिल्म नमक हराम में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए बीएफजेए पुरस्कार से सम्मानित
  • 1987 में, फिल्म अमृत में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए बीएफजेए पुरस्कार से सम्मानित
  • 2005 में, प्राइड ऑफ फिल्म इंडस्ट्री अवॉर्ड से सम्मानित
  • 2009 में, आईआईएफए (आईफा) लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित
  • 2009 में, ऑल इंडिया फिल्म वर्कर्स एसोसिएशन लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित
  • 2013 में, पद्म भूषण पुरुस्कार(मरणोपरांत)

अभिनय में रूचि:

राजेश खन्ना को अभिनय में शुरू से ही रूचि रही जिसके कारण स्कूल में ही बने थिएटर में अभिनय को सिखना शुरू किया और इसी के साथ उसमे अभिनय करने लगे.
कॉलेज के दिनों में नाटक प्रतियोगिता में भी भाग लेते थे और इन्होने कई पुरस्कार जीते.
स्पोर्टस कार में सफ़र: 
थिएटर और फिल्मों में काम पाने लिए उन्होंने काफी संघर्ष किये.  निर्माताओं के दफ्तरों के चक्कर लगते थे. लेकिन इनकी शानो शौकत में कोई कमी नहीं थी हमेशा स्पोर्टस कार में ही सफ़र करते थे और जाते थे. उस समय इतनी महँगी गाड़ी से काम की तलाश करना एक बहुत बड़ी बात थी. उस दौर के चर्चित हीरो के पास इस तरह की कार नहीं होती थी.

राजेश खन्ना प्रारंभिक जीवन –

राजेश खन्ना को भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार के रूप में श्रेय दिया जाता है, राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर 1942 को पंजाब राज्य में अमृतसर में हुआ था। राजेश खन्ना का असली नाम जतीन हैं जिनका पालन पोषण लीलावती चुन्नीलाल खन्ना ने कीया था। लीलावती खन्ना, जो राजेश खन्ना के जैविक माता-पिता के रिश्तेदार थे और उन्होंने राजेश खन्ना को गोद लिया था। राजेश खन्ना के जैविक माता-पिता लाला हिरणंद और चंद्रराणी खन्ना थे जो पूर्व-विभाजन वाले पाकिस्तान से अमृतसर में आकर बस गए थे।

राजेश खन्ना ने सेंट सेबैस्टियन के गोयन हाई स्कूल में अपने दोस्त रवि कपूर के दाखिला लिया, जिन्हें अभी जितेंद्र के नाम से जाना जाता हैं। खन्ना ने धीरे-धीरे थियेटर में दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया, बहुत सारे मंच और थिएटर अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों में खेलता रहा, और अंतःविषय कॉलेज नाटक प्रतियोगिताओं में कई पुरस्कार जीते।

1962 में, खन्ना ने अन्धा युग नाटक में एक घायल मौत का सिपाही का रोल निभाया और उनके प्रदर्शन से मुख्य अतिथि प्रभावित हुए उन्हें जल्द फिल्मों में आने का सुझाव दिया, जिन्होंने 1960 के दशक के आरंभ में थिएटर और फिल्मों में काम करने के लिए संघर्ष किया।

राजेश खन्ना ने 1959 से 1961 तक पुणे के नौवरजी वाडिया कॉलेज में अपनी पहली दो वर्ष की कला स्नातक की। बाद में खन्ना के सी सी कॉलेज, मुंबई और जीतेन्द्र में अध्ययन सिद्धार्थ जैन कॉलेज से हुआ। खन्ना ने अपनी पहली फिल्म ऑडिशन के लिए जितेंद्र को पढ़ा। खन्ना के चाचा के.के. तलवार ने राजेश को खन्ना का पहला नाम बदला जब उन्होंने फिल्मों में शामिल होने का फैसला किया।

राजेश खन्ना फिल्मी कैरियर –

उन्होंने 1969-72 में लगातार 15 solo सुपरहिट फिल्में दिया – सच्चा झूठा, इत्त्फ़ाक़, दो रास्ते, बंधन, डोली, सफ़र, कटी पतंग, आराधना,आन मिलो सजना, ट्रैन, आनन्द, दुश्मन, महबूब की मेंहदी, खामोशी, हाथी मेरे साथी।

बाद के दिनों में 1972-1975 तक अमर प्रेम, दिल दौलत दुनिया, जोरू का गुलाम, शहज़ादा, बावर्ची, मेरे जीवन साथी, अपना देश, अनुराग, दाग, नमक हराम, अविष्कार, अज़नबी, प्रेम नगर, रोटी, आप की कसम और प्रेम कहानी जैसी फिल्में भी कामयाब रहीं।

1976-78 में महा चोर, छलिया बाबू, अनुरोध, भोला भाला, कर्म कामयाब रहा। उन्होंने 1979 में वापसी किया अमर दीप के साथ। उन्होंने 1980-1991 तक बहुत सारे सफल फिल्में दी। 1979-1991 के दौरान उन्होंने कई सफल सिनेमा किये।

1991 के बाद राजेश खन्ना का दौर खत्म होने लगा। बाद में वे राजनीति में आये और 1991 वे नई दिल्ली से कांग्रेस की टिकट पर संसद सदस्य चुने गये। 1994 में उन्होंने एक बार फिर खुदाई फिल्म से परदे पर वापसी की कोशिश की। 1996 में उन्होंने सफ़ल फिल्म “सौतेला भाई” की। आ अब लौट चलें, क्या दिल ने कहा, प्यार ज़िन्दगी है, वफा जैसी फिल्मों में उन्होंने अभिनय किया लेकिन इन फिल्मों को कोई खास सफलता नहीं मिली। कुल उन्होंने 1966-2013 में 117 फिल्म की और 117 में 91 हिट रही। कुल उन्होंने 1966-2013 में 163 फिल्म किया और 105 हिट रहे।

राजेश खन्ना व्यक्तिगत जीवन –

1960 के दशक के उत्तरार्ध में और 1970 के दशक के शुरुआती दिनों में, खन्ना तब के फैशन डिजाइनर और अभिनेत्री अंजू महेंद्रू के साथ प्यार में गिर गए थे। वे सात साल के लिए एक रिश्ते में थे सूत्रों के अनुसार इस ब्रेक-अप के बाद युगल 17 साल के लिए एक-दूसरे से बात नहीं करते थे।

बाद में खन्ना ने मार्च 1973 में उभरते अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया से शादी की, इससे पहले कपाडिया की पहली फिल्म बॉबी उस साल नवंबर में रिलीज हुई थी।उनकी शादी से दो बेटियां हैं; ट्विंकल और रिंकी । खन्ना और कपाडिया ने 1984 में अलग होकर तलाक की कार्यवाही पूरी नहीं की थी।

1980 के दशक में 1991 से 1987 के बीच 11 फिल्मों में खन्ना के साथ काम करते हुए टीना मुनीम रोमांटिक रूप से खन्ना से जुड़े थे। मुनीम अपने स्कूल के दिनों से राजेश के प्रशंसक थी। वेबसाइट के अनुसार, बॉलीवुड मंत्र के रिपोर्टर टीना के साथ संबंध 1987 में खत्म हो गए, जब खन्ना ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया क्योंकि उनकी शादी के कारण उनकी बेटियों पर बुरा असर पड़ेगा।

हालांकि खन्ना और कपाडिया ने एक सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखा जहां दोनों को एक साथ पार्टियों और परिवार के कार्यों में देखा गया। कपाडिया ने खन्ना के चुनाव के लिए प्रचार किया और उनकी फिल्म जय शिव शंकर (1990) में काम किया।

राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर 

वैसे तो राजेश खन्ना ने अनेक अभिनेत्रियों के साथ फिल्मों में काम किया, लेकिन शर्मिला टैगोर और मुमताज के साथ उनकी जोड़ी खासतौर पर लोकप्रिय हुई. उन्होंने शर्मिला के साथ आराधना, सफर, बदनाम, फरिश्ते, छोटी बहू, अमर प्रेम, राजा रानी और आविष्कार में जोड़ी बनाई, जबकि दो रास्ते, बंधन, सच्चा झूठा, दुश्मन, अपना देश, आपकी कसम, रोटी तथा प्रेम कहानी में मुमताज के साथ उनकी जोड़ी बहुत पसंद की गई.

राजेश खन्ना ने वर्ष 1973 में खुद से उम्र में काफी छोटी नवोदित अभिनेत्री डिम्पल कपाडि़या से विवाह किया और वे दो बेटियों ट्विंकल और रिंकी के माता-पिता बने.

हालांकि राजेश और डिम्पल का वैवाहिक जीवन ज्यादा दिनों तक नहीं चल सका और कुछ समय के बाद वे अलग हो गए. राजेश फिल्मों में व्यस्त रहे और डिम्पल ने भी अपने कॅरियर को तरजीह देना शुरू किया. करीब डेढ़ दशक तक प्रशंसकों के दिल पर राज करने वाले राजेश खन्ना के कॅरियर में 80 के दशक के बाद उतार शुरू हो गया.

बाद में उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा और वर्ष 1991 से 1996 के बीच नई दिल्ली से कांग्रेस के लोकसभा सांसद भी रहे. वर्ष 1994 में उन्होंने खुदाई से अभिनय की नई पारी शुरू की. उसके बाद उनकी आ अब लौट चलें (1999), क्या दिल ने कहा (2002), जाना (2006) और 2008 में रिलीज हुई वफा के साथ उनका सफर अब भी जारी है.

पहली फिल्म थी ‘आखिरी खत’

1966 में राजेश खन्ना की पहली फिल्म आखिरी खत रिलीज हुई थी. राजेश खन्ना को असली कामयाबी 1969 में आई फिल्म आराधना से मिली, जो उनकी पहली सुपरहिट फिल्म थी. इस फिल्म ने उन्‍हें सुपरस्टार बना दिया.

1969 से 1975 के बीच राजेश खन्ना ने लगातार 15 सुपरहिट फिल्म दीं. देशभर में उनका ऐसा जादू चला कि उस दौर में पैदा होने वाले ज्यादातर बच्चों के नाम राजेश रखे जाने लगे. देशभर में उनको लेकर ऐसी दीवानगी थी कि पूरा देश उन्हें काका कहकर बुलाने लगा. उस दौर में एक कहावत मशहूर हुआ करती थी, ऊपर आका और नीचे काका.

खून से खत लिखती थीं लड़कियां!

उस दौर में राजेश खन्ना ने जो लोकप्रियता हासिल की थी, आज के जमाने में उसके आसपास भी कोई नहीं पहुंच सकता. उस दौर के स्टाइलिश और हैंडसम हीरो थे राजेश खन्ना. तब के युवा खासतौर पर उनके जैसे कपड़े बनवाया करते थे. लड़कियों में उनको लेकर ऐसी दीवानगी थी कि उनकी एक झलक पाने लिए घंटों इंतजार करतीं. कहा तो ये भी जाता है कि उस दौर में लड़कियां उन्हें खून से खत लिखा करती थीं और उनकी फोटो से शादी करती थीं.

राजेश खन्ना की सफेद रंग की कार जहां रुकती थी, लड़कियां उस कार को ही चूम लेती थी. लिपिस्टिक के निशान से सफेद रंग की कार गुलाबी हो जाया करती थी. कहा तो ये भी जाता है कि एक बार राजेश खन्ना अस्पताल में भर्ती थे, तो उनके इर्द-गिर्द के कमरे फिल्‍म निर्माताओं ने बुक करा लिए, ताकि मौका मिलते ही वो राजेश को अपनी फिल्मों की कहानी सुना सके.

डिंपल से कैसे हुई पहली मुलाकात

एक प्रोग्राम में हिस्सा लेने के लिए राजेश खन्ना प्लेन से अहमदाबाद जा रहे थे, प्लेन में डिंपल की बगल वाली सीट पर राजेश खन्ना जाकर बैठ गए. उस वक्त डिंपल की पहली फिल्म बॉबी रिलीज होने वाली थी. पहली मुलाकात के बाद ही राजेश खन्ना और डिंपल ने एक दूसरे से शादी का फैसला कर लिया. हालांकि दोनों की उम्र में काफी फासला था, लेकिन प्यार के आगे मजबूर इस जोड़े ने 1973 में शादी कर ली.

हालांकि राजेश खन्ना और डिंपल की शादी ज्यादा दिन तक नहीं चल पाई और 1984 में दोनों अलग हो गए.

आनंद की कामयाबी

अमिताभ बच्चन जिस दौर में फिल्मों में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे थे, उस वक्त राजेश खन्ना सुपरस्टार हुआ करते थे. दोनों की पहली मुलाकात आनंद फिल्म के सेट पर हुई थी, इस फिल्म में आनंद की मौत के बाद भास्कर बनर्जी बने अमिताभ के आंसुओं ने लाखों लोगों को रुला दिया था.

आनंद के एक-एक डायलॉग से राजेश खन्ना को दर्शकों की तालियां मिलीं. इस फिल्म में अमिताभ और राजेश की केमिस्ट्री ने इतिहास रच दिया था.

अमिताभ इस फिल्म में सहायक एक्टर थे और राजेश खन्ना इस फिल्म की जान थे. 1973 में एक बार फिर अमिताभ और राजेश खन्ना फिल्म नमक हराम में साथ आए. इस फिल्‍म में दोनों का किरदार बराबरी का था. ये वो दौर था, जब अमिताभ धीरे-धीरे कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ रहे थे और राजेश खन्ना पर स्टारडम हावी होता जा रहा था.

गुमनामी के दौर में काका

राजेश खन्ना के करीबी वरिष्ठ पत्रकार अली पीटर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि राजेश खन्ना के अंदर अमिताभ को लेकर असुरक्षा की भावना आ गई थी. फिल्म बावर्ची में जब जया और राजेश खन्ना एक साथ काम कर रहे थे, तब अमिताभ अक्सर जया को लेने उनके सेट पर जाया करते थे. राजेश खन्ना कभी भी अमिताभ से बात नहीं करते थे, जो बात जया को जरा भी पसंद नहीं आती थी. यहां तक किए एक दिन जया ने ये कह दिया था कि एक दिन अमिताभ राजेश खन्ना से बड़े सुपरस्टार बनेंगे.

जया की बात सच साबित हुई और फिल्म जंजीर के बाद अमिताभ सफलता के शिखर पर पहुंच गए और राजेश खन्ना का सितारा गर्दिश में जाने लगा. राजेश खन्ना की कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर दम तोड़ने लगीं. ऐसे किस्से मशहूर हैं कि राजेश खन्ना ने कई फिल्मों के ऑफर तक ठुकरा दिए थे. एंग्री यंगमैन के रूप में अमिताभ शोहरत के आसमान पर थे और राजेश खन्ना गुमनामी के अंधेरे में खोते जा रहे थे.

राजनीति में भी रखा कदम

फिल्मों से निराश होकर राजेश खन्ना ने राजनीति में भी कदम रखा. 90 के दशक में राजेश खन्ना ने कांग्रेस की सीट पर नई दिल्ली से लालकृष्‍ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव लड़ा था. हालांकि राजेश खन्ना चुनाव हार गए थे.

आडवाणी ने जब बाद में गांधीनगर सीट के लिए नई दिल्ली की सीट छोड़ दी, तो बाद में इस सीट से राजेश खन्ना से शत्रुघ्न सिन्हा को हराया और वो सांसद बने. हालांकि अगले चुनाव में राजेश खन्ना को हार मिली, तो वो फिर फिल्मों में लौट आए. लेकिन उन्हें फिर वो कामयाबी नहीं मिली.

18 जुलाई 2012 को राजेश खन्ना ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया.

अंतिम समय:

राजेश खन्ना का स्वास्थ्य 2011 से लगातार और ख़राब  रहने लगा था उन्हें कैंसर की बीमारी थी. 23 जून  2012 में उनकी सेहत और बिगड़ने लगी तब उन्हें लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया और वह इलाज के बाद 8 जुलाई को छुट्टी मिल गयी लेकिन फिर 14 जुलाई को उनकी तबियत बिगड़ने तब फिर से उन्हें लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया.


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