कैप्टन विक्रम बत्रा का जीवन परिचय

कैप्टन विक्रम बत्रा परमवीर चक्र से सम्मानित भारत के सैनिक थे। इन्हें यह सम्मान सन् 1999 में मरणोपरांत मिला।

कैप्टन विक्रम बत्रा का जन्म

कैप्‍टन विक्रम बत्रा का जन्‍म 9 सितंबर 1974 को हिमाचल प्रदेश के पालमपुर जिले के घुग्‍गर में हुआ था। उनके पिता का नाम जीएम बत्रा और माता का नाम कमलकांता बत्रा था।विक्रम के पिता गिरधारी लाल बत्रा एक सरकारी स्कूल में हेडमास्टर थे और उनकी माँ कमल कांता बत्रा भी एक स्कूल में अध्यापक थी।विक्रम का एक जुड़वाँ भाई भी था जिसका नाम विशाल था और इनकी दो बहने भी थी – सीमा एवं नूतन।विक्रम की माँ आद्यात्मिक थी इसीलिए उन्होंने विक्रम के बचपन का नाम लव एवं उनके जुड़वे भाई के बचपन का नाम कुश रखा था।

कैप्टन विक्रम बत्रा की शिक्षा

विक्रम बत्रा ने अपनी शुरुवाती पढ़ाई हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में स्थित डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल से की उसके बाद उन्होंने पालमपुर में ही स्थित केंद्रीय विद्यालय में दाखिला ले लिया जहा पर उन्होंने कक्षा आठवीं से कक्षा बारहवीं तक की पढ़ाई की। केंद्रीय विद्यालय में पढ़ाई के दौरान वह टेबल टेनिस खेला करते थे जिसमे उन्हें पढ़ाई से ज्यादा महारत हासिल थी। विक्रम का केंद्रीय विद्यालय आर्मी क्षेत्र में होने के कारण वे प्रतिदिन आर्मी की ट्रेनिंग,अनुशासन वगैरह देखा करते थे जिसकी वजह से विक्रम के मन भी आर्मी में भर्ती होने की इच्छा जागी। बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद विक्रम ने चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में विज्ञान विषय में स्नातक पूरी करने के दाखिला ले लिया।

कैप्टन विक्रम बत्रा का सेना भर्ती में शुरुआती जीवन

जब विक्रम बत्रा ने डीएवी कॉलेज में दाखिला लिया था तभी से उन्होंने भारतीय सेना में भर्ती होने का मन बना लिया था। डीएवी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वे एनसीसी के एयर विंग में शामिल हो गए।उन्होंने एनसीसी के एयर विंग को ज्वाइन करके पिंजौर एयरफील्ड और फ्लाइंग क्लब में 40 दिन की ट्रेनिंग हासिल की। विक्रम को एनसीसी का सबसे बड़ा ‘C’ सर्टिफिकेट मिला और NCC में विक्रम बत्रा को ”कैप्टन” का रैंक दिया गयाएनसीसी के सबसे बढ़िया कैडेड चुने गए थे जिसके बदौलत उनको साल 1994 में 26 जनवरी को एनसीसी कैडेट के रूप में परेड में शामिल होने मौका मिला था।साल 1994 में विक्रम को हांगकांग में मर्चेन्ट नेवी की नौकरी मिल रही थी लेकिन उनको भारतीय सेना थल सेना में भर्ती होना था इसीलिए उन्होंने इस नौकरी को ठुकरा दिया।साल 1995 में चंडीगढ़ के पंजाब विश्वविद्यालय में अपनी पढ़ाई के दौरान विक्रम दिन में एक ट्रैवल एजेंसी में काम किया करते थे और रात के समय कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) की तैयारी किया करते थे।

कैप्टन विक्रम बत्रा की आर्मी ट्रेनिंग

साल 1996 विक्रम बत्रा ने मानेकशॉ बटालियन (IMA) में दाखिला ले लिया। साल 1997 में विक्रम ने मानेकशॉ बटालियन (IMA) से अपनी 19 महीने की ट्रेनिंग को पूरा किया और उसके बाद उन्होंने साल 1996 में विक्रम CDS परीक्षा में पास हो गए और इलाहाबाद में स्थित सेवा चयन बोर्ड (SSB) के द्वारा उनको चुना गया।विक्रम को भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में भर्ती होने का मौका मिला जिसके लिए उन्होंने चंडीगढ़ के पंजाब विश्वविद्यालय की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। 1996 में विक्रम ने इंडियन मिलिटरी अकैडमी में दाखिला लिया। 13 जम्मू ऐंड कश्मीर राइफल्स में 6 दिसम्बर 1997 को लेफ्टिनेंट के पोस्ट पर विक्रम की जॉइनिंग हुई।

विक्रम बत्रा से कैप्टन विक्रम बत्रा का सफ़र

साल 1999 में जब भारत के साथ पाकिस्तान का कारगिल युद्द शुरू हुआ तब विक्रम बत्रा को उनकी एक टुकड़ी के साथ कारगिल युद्द में भेजा गया जहा पर उन्होंने अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ साहस का परिचय देते हुए हम्प व राकी नाब जीतकर अपने कब्जे में ले लिया था। उनका यह सहस देख कर कैप्टन के पद पर नियुक्त किया गया इस तरह वे विक्रम बत्रा से कैप्टन विक्रम बत्रा बने।

कैप्टन विक्रम बत्रा का कारगिल युद्ध में योगदान

जब उन्होंने वापस अपनी बटालियन को ज्वाइन किया तो शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश की ओर जाने के लिए कहा गया उनकी बटालियन ने 8 माउंटेन डिवीजन के 192 माउंटेन ब्रिगेड के तहत जम्मू कश्मीर से आतंकवादियों को मार गिराया उसके बाद उनकी बटालियन को वहा से निकलने के आदेश दे दिए गए। पाकिस्तानी सेना ने द्रास सेक्टर में ऑटोमैटिक हथियारों के साथ कब्ज़ा किया हुआ था। द्रास सेक्टर ,लद्दाख जिले में 5140 चोटी पर बसा हुआ एक हिल स्टेशन है।

5140 चोटी पर विजय

20 जून 1999 में कमांडर डेल्टा कंपनी के कैप्टन विक्रम बत्रा को पॉइंट 5140 पर ऑपरेशन VIJAY के दौरान को हमला करने के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी सौपी। कैप्टन विक्रम बत्रा और उनकी टुकड़ी ने बहुत ही साहस के साथ चार आतंकवादियों को मार गिराया और 20 जून 1999 को सुबह तीन बजकर 30 मिनट पर अपनी टुकड़ी के साथ इस इलाके पर कब्ज़ा कर लिया। विक्रम बत्रा ने इस चोटी के शिखर पर खड़े होकर रेडियो के माध्यम से एक कोल्डड्रिंक कंपनी की कैचलाइन ‘यह दिल मांगे मोर’ को उद्घोष के रूप में कहा तो सेना ही नहीं बल्कि पूरे भारत में उनका नाम छा गया। अब हर तरफ बस ‘यह दिल मांगे मोर’ ही सुनाई देता था। इसके बाद सेना ने चोटी 4875 को भी कब्जे में लेने का अभियान शुरू कर दिया था।

4875 वाली संकरी चोटी पर विजय

5140 चोटी पर विजय प्राप्त करने के बाद कैप्टन विक्रम बत्रा और उनकी टुकड़ी को अब 4875 वाली संकरी चोटी पर विजय करने के लिए उन्हें इस अभियान पर भेजा गया। पहाड़ की इस छोटी पर एकदम सीधी चढ़ाई थी और छोटी के एकमात्र रास्ते को पाकिस्तानी सेना ने अपने कब्जे में ले रखा था। इतनी मुश्किलों के बावजूद कैप्टन विक्रम बत्रा और उनकी टुकड़ी ने एक बेहद ही संर्कीण पठार के पास दुश्मनो पर आक्रमण करने का प्लान बनाया और इस प्लान के तहत आमने सामने की लड़ाई में विक्रम बत्रा ने पाकिस्तानी सेना के पांच सेनिको को पॉइंट ब्लैक रेंज में मार गिराया।

कैप्टन विक्रम बत्रा को मिले सम्मान व पुरस्कार

कैप्टन विक्रम बत्रा की मूर्ति
  • इस अदम्य साहस और पराक्रम के लिए कैप्टन विक्रम बत्रा को 15 अगस्त 1999 को भारत सरकार द्वारा मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया जो 7 जुलाई 1999 से प्रभावी हुआ।
  • पॉइंट 4785 पर विक्रम बत्रा और उनकी टीम के द्वारा विजय प्राप्त करने के बाद विक्रम बत्रा को सम्मान देने के लिए इस पहाड़ को बत्रा टॉप के नाम से जाना जाने लगा ।
  • उनकी वीरता की याद में जबलपुर की एक छावनी को विक्रम बत्रा एंक्लेव कहा जाता है ।
  • विक्रम बत्रा के सम्मान में इलाहाबाद के एक हॉल का नाम विक्रम बत्रा ब्लॉक रख दिया गया।
  • भारतीय सैन्य अकादमी(IMA ) देहरादून, मेस का नाम उनके सम्मान में विक्रम बत्रा मेस रख दिया गया।
  • चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज जहां विक्रम बत्रा ने अपनी शिक्षा हासिल की थी वहां पर विक्रम बत्रा एवं युद्ध के दिग्गजों के लिए एक इमारत बनाई गई है।
  • विक्रम बत्रा के सम्मान में साल 2019 में दिल्ली के मकबरा चौक और उसके फ्लाईओवर को शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा का नाम दिया गया ।

कैप्टन विक्रम बत्रा का बलिदान (निधन)

4875 वाली संकरी चोटी वाले अभियान के दौरान पाकिस्तानी सेना से आमने सामने की लड़ाई में उनको कई गंभीर घाव हो गए। गंभीर घाव की वजह से उनका चलना मुश्किल हो गया था लेकिन फिर भी उन्होंने रेंगते हुए जाकर दुश्मनो की ग्रेनेड फेंक कर उनका सफाया कर दिया। अपनी जान की परवाह किये बगैर विक्रम और उनकी टुकड़ी ने दुश्मनो पर आक्रमण जारी रखा और एक एक करके सारे दुश्मनो को मारते हुए आगे बढ़ते गएइस लड़ाई में उनके एक साथी को गोली लग गई थी जिसको बचाने के लिए जैसे ही सीधे खड़े हुए दुश्मनो की नजरो में आ गये। एक दुश्मन स्नाइपर द्वारा छाती में बहुत करीब से गोली मार दी गई और थोड़ी देर बाद दूसरी गोली उनके सर में आके लगी और गोली लगते ही विक्रम अपने उस घायल साथी के बगल में गिर गए और जिसके बाद उन्होंने 7 जुलाई 1999 को अंतिम सांस ली और इस तरह वे वीरगति को प्राप्त हुए।उनकी मौत के बाद उनके साथी बदला लेने की भावना से दुश्मनो पर बुरी तरह से टूट पड़े और 4875 वाली संकरी चोटी को अपने कब्जे में ले लिया।

कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन पर बनी फिल्म

सन 2013 में कारगिल युद्द के ऊपर आधारित एक फिल्म ”LOC कारगिल” बनी थी जिसमे कैप्टन विक्रम बत्रा का किरदार अभिनेता अभिषेक बच्चन ने निभाया था।सन 2021 की फिल्म शेरशाह में, सिद्धार्थ मल्होत्रा ने विष्णुवर्धन द्वारा निर्देशित और धर्मा प्रोडक्शंस और पेन इंडिया लिमिटेड द्वारा निर्मित एक बायोपिक में बत्रा की भूमिका निभाई।

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