लिओनार्दो दा विंची का जीवन परिचय

लिओनार्दो दा विंची इटलीवासी, महान चित्रकार, मूर्तिकार, वास्तुशिल्पी, संगीतज्ञ, कुशल यांत्रिक , इंजीनियर तथा वैज्ञानिक थे।

लिओनार्दो दा विंची

लिओनार्दो दा विंची का जन्म व प्रारंभिक जीवन

लिओनार्दो दा विंची का जन्म इटली के फ्लोरेंस प्रदेश के विंचि नामक ग्राम में 15 अप्रैल, 1452 को हुआ था। इस ग्राम के नाम पर इनके कुल का नाम पड़ा। इनकी मां का नाम कटरीना था।लिओनार्दो दा विंची अवैध पुत्र थे। शारीरिक सुंदरता तथा स्फूर्ति के साथ साथ इनमें स्वभाव की मोहकता, व्यवहारकुशलता तथा बौद्धिक विषयों में प्रवीणता के गुण थे।उनके पिता एक प्रसिद्ध वकील थे और माँ विंची की ही किसी सराय में कभी नौकरानी रही थी| लिओनार्दो दा विंची का बचपन अपने दादा के घर में ही बीता था |ऐसा माना जाता है कि लिओनार्दो दा विंची की माता ने वकील साहब के अवैध पुत्र को जन्म दिया था | अपने पुत्र को अपने उसके पिता को सुपुर्द कर उस महिला ने किसी भवन निर्माता से विवाह कर लिया था |

जन्म 15 अप्रैल, 1452
स्थानफ्लोरैंस, इटली
निधन2 मई, 1519
निधन स्थानक्लुाउक्स, फ्रांस

लिओनार्दो दा विंची की शिक्षा

सन 1469 में लिओनार्दो दा विंची के पिता उनके साथ फ्लोरेंस आ गये जहा पर उनकी चाची ने उनकी कई वर्षो तक देखभाल की थी | फ्लोरेंस में ही उनकी शिक्षा दीक्षा पूर्ण हुयी थी | स्कूल से ही लिओनार्दो दा विंची की प्रतिभा सामने आने लगी थी जबकि गणित की मुश्किल से मुश्किल समस्याओ का समाधान वो चुटकियो में ही कर लेते थे | सन 1482 इस्वी तक उन्होंने विविध विषयों में शिक्षा प्राप्त कर ली थी | जब वो केवल 14 वर्ष के थे तभी अचानक उनके मन में मुर्तिया बनाने का शौक उभरा था | इस आयु में उन्होंने ऐसी मुर्तिया बनाई जिनकी सभी ने प्रशंशा की थी | जब उन्होंने अपनी शिक्षा पुरी कर ली थी तब उनके पास आय का कोई साधन नही था |

बचपन में ही वे प्रकृति के मनोरम दृश्यों में खोये रहते थे । जीवों से इतना प्रेम था कि वे शाकाहारी थे । बाल्यकाल में ही उनकी पहचान वीरोचियो से हुई, जिनसे उन्होंने चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला, अभियान्त्रिकी कला का प्रशिक्षण प्राप्त किया । वीरोचियो उनकी इस लगन और परिश्रग को देखकर बहुत खुश हुए । समय के साथ-साथ लियोनार्डो ने अपने चित्रों में नवीन तकनीकी का इस्तेमाल किया । उन्होंने किसी वस्तु का चित्र वनाते समय उस पर पड़ने वाले प्रकाश और छाया का चित्र शी अलग-अलग कोणों तथा अलग-अलग मात्रा में इस प्रकार प्रस्तुत किया कि लोग दातों तले उंगली दबाने पर मजबूर छो जाते थे ।

लिओनार्दो दा विंची के कार्य

लेओनार्डो चित्रकारी, वास्तुकला, शरीरसंरचना, ज्योतिष, प्रकाशिकी, जल-गति-विज्ञान तथा यांत्रिकी पर अलग अलग ग्रंथ लिखना चाहते थे, इन विषयों पर इनके केवल अपूर्ण लेख या टिप्पणियाँ प्राप्य हैं। लेओनार्डों ने इतने अधिक वैज्ञानिक विषयों पर विचार किया था तथा इनमें से अनेक पर इनकी टिप्पणियाँ इतनी विस्तृत हैं कि उनका वर्णन यहाँ संभव नहीं है। ऊपर लिखे विषयों के अलावा वनस्पति विज्ञान, प्राणिविज्ञान, शरीरक्रिया विज्ञान, भौतिकी, भौमिकी, प्राकृतिक भूगोल, जलवायुविज्ञान, वैमानिकी आदि अनेक वैज्ञानिक विषयों पर इन्होंने मौलिक तथा अंत:प्रवेशी विचार प्रकट किए हैं। गणित, यांत्रिकी तथा सैनिक इंजीनियरी के तो ये विद्वान् थे ही, आप दक्ष संगीतज्ञ भी थे।

लियोनार्डो युद्ध के घोर विरोधी थे, पर विडंबना यह कि उन्हें हिंसक अस्‍‍त्र-शस्‍‍त्र, युक्‍तियाँ, उपकरण आदि तैयार करने पड़े। परिस्थितियाँ इतनी प्रतिकूल थीं कि उनके तमाम चित्र, मूर्तियाँ, मॉडल आदि अधूरे ही रह गए। उनके डिजाइन किए हुए शहर, नहरें, बाँध आदि कागजों पर ही चिपके रह गए। बाद के वैज्ञानिकों, कलाकारों, दार्शनिकों ने उन्हें अपना आदर्श माना और उनके बनाए स्कैचों, डिजाइनों, मॉडलों आदि को मूर्त रूप दिया। उस काल में की गई उनकी कल्पनाएँ—जैसे पनडुब्बी, हेलीकॉप्टर, टैंक, सर्पिल सीड़ियाँ, साफ-सुथरे शहर, अद‍्भुत खिलौने—आज साकार हो चुकी हैं।

लिओनार्दो दा विंची के अविष्कार

30 वर्ष तक वह फ्लोरैंस मे अध्ययन करते रहे और कुछ न कुछ काम करते रहे।लेकिन उनकी आमदनी बहुत कम थी। सन 1482 मे इन्होने मिलान के डयूक को एक पत्र लिखा। जिसमे उन्होंने नौकरी के लिए अपील की थी।डयूक ने उन्हें अपने यहां सेना मे इंजिनियर के पद पर नियुक्त कर लिया। सेना इंजिनियर के रूप मे लिओनार्दो दा विंची ने अनेक नये सुझाव दिए।जिसमे रासायनिक धुएँ से लेकर अस्त्र सस्त्र से युक्त वाहनों और शक्तिशाली हथियारों तक के प्रस्ताव थे।

उन्होंने एक ऐसे हथियार का डिजाइन भी तैयार किया जो शत्रुऔ पर गोलियों की बौछार कर सकता था।मिलान मे रहकर इन्होने भवन निर्माता का भी काम किया। इन्होने अनेक सड़को, नहरों, गिरजाघरों, आदि के डिजाइन प्रस्तुत किये।सन 1495 मे इन्होने अपनी प्रसिद्ध पेंटिंग “लास्ट सपर ” बनानी आरम्भ की, जो सन 1497 मे पूरी हुई।सन 1499 मे लिओनार्दो दा विंची वेनिस आ गए।उस समय तुर्की के साथ युद्ध चल रहा था।वेनिस मे उन्होंने बहुत से युद्ध सम्बन्धित विचार प्रस्तुत किये।उस समय लिओनार्दो के सभी विचारों उत्पादन की दृष्टि से बहुत महगें थे।इसलिए उन्हें कार्य रूप न दिए जा सका।

लियोनार्डो दा विंची के विचार

  • मैं उनसे प्रेम करता हूँ जो मुसीबत में मुस्कुरा सकें और जो संकट में शक्ति एकत्रित कर सकें , और जो आत्मचिंतन से साहसी बन सकें।
  • जहाँ मैं सोचता था कि मैं जीना सीख रहा हूँ, वहीँ मैं मरना सीख रहा था।
  • सादगी परम जटिलता है।
  • एक अच्छी तरह से बिताया दिन सुखद नींद लेकर आता है |
  • कला कभी ख़त्म नहीं होती , उसे बस त्याग दिया जाता है।
  • सबसे बड़ी ख़ुशी समझने की ख़ुशी है।
  • जैसे एक अच्छी तरह बिताया दिन सुखद नींद लेकर आता है , उसी तरह एक अच्छी तरह बिताया जीवन एक सुखद मौत लेकर आता है।
  • मैं किसी काम को करने की तत्परता से प्रभावित हूँ। सिर्फ जानना पर्याप्त नहीं है ; हमें लागू करना चाहिए। इच्छा रखना काफी नहीं है ; हमें करना चाहिए।
  • आंखें क्यों किसी चीज को जगे हुए कल्पना करने की तुलना में सपनों में ज्यादा स्पष्ठ्टा से देखती हैं?
  • जहाँ आत्मा हाथों से काम नहीं करती वहाँ कोई कला नहीं है।
  • वो जो सिद्धांत जाने बिना अभ्यास से प्रेम करता है , उस नाविक के समान है जो जहाज पर बिना पतवार और कम्पास के चढ़ जाता है और कभी नहीं जानता कि वो किधर जा सकता है।
  • प्रकृति कभी अपने नियम नहीं तोड़ती।
  • जो सदाचार बोता है वो सम्मान काटता है।
  • समय उसके लिए लम्बे समय तक रहता है जो इसका इसका इस्तेमाल करता है।
  • वो जो एक दिन में अमीर बनना चाहता है, उसे एक साल में फांसी पर लटका दिया जायेगा।
  • जो आप नहीं समझते, यदि उसकी प्रशंशा करते हैं तो बुरा करते हैं, लेकिन अगर निंदा करते हैं तो और भी बुरा करते हैं।
  • हर उस व्यक्ति के लिए समय की कोई कमी नहीं रहेगी जिसे समय का उपयोग करना आता है।
  • शादी साँपों से भरे बैग में इस आशा के साथ हाथ डालना है कि मछली निकले।
  • जिस जगह पर लोग चिल्ला कर या चीख कर बात करते है वहां सच्ची जानकारियां नहीं मिल सकती।
  • आप अच्छे लीडर बनना चाहते है, ये सभी चाहते है कि लोग आपकी बात सुने तो ज्यादा बातचीत न करे। चुप्पी को हथियार बनाए।
  • अनुपयोग से लोहा जंग खा जाता है, स्थिरता से पानी अपनी शुद्धता खो देता है… इसी तरह निष्क्रियता मस्तिष्क की ताकत सोख लेती है।
  • विज्ञान, आर्मी का कप्तान और प्रैक्टिस, सैनिकों की तरह होती है।
  • एक खूबसूरत शरीर ख़त्म हो सकता है, लेकिन एक आर्ट वर्क कभी खत्म नहीं होता।
  • समय के साथ किसी भी चीज को जोड़ा जा सकता है, वह सच ही हो सकता है।

लिओनार्दो की प्रसिद्ध पेंटिंग मोनालिसा

  • सन 1500 के बाद वह फ्लोरैंस वापस आ गए।और सन 1503 से 1506 तक उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पेंटिंग मोनालिसा (Monalisa ) बनाई।यह चित्र उन्होंने उन दिनों बनाना शुरू किया जब वह 51 वर्ष के थे।और उस समय मोनालिसा 54 वर्ष की थी।मोनालिसा हर रोज दोपहर के बाद उनके स्टूडियो मे आती थी।तीन साल तक कठिन परिश्रम करने के बाद जब वह पेंटिंग पूरी हो गयी, तो इसकी सुंदरता को देखकर लिओनार्दो स्वयं मोहित हो गए। “इस पेंटिंग मे मोनालिसा के चेहरे से एक अद्धभुत मुस्कान झलकती है।और आँखों से एक विचित्र नशीलापन टपकता है। ” इस पेंटिंग को एक बार देखने के बाद हर कोई इसे बार बार देखना चाहता है।ये पेंटिंग ही लिओनार्दो की प्रसिद्ध पेंटिंग मानी गई हैं।
  • इस चित्र को पूरा करने के बाद लिओनार्दो फिर मिलान चले गए।वह सन 1506 से 1513 तक मिलान मे रहे।अंत मे मिलान फ्रांस के शासक के अंतर्गत आ गया। वहा इन्हे “वर्जिन एंड चाइल्ड ” तथा ” सेंट एने ” पेंट करने के लिए कहा गया। यह चित्र इतनी अच्छी बनी की हर देखने वाला इनका दीवाना हो गया।

लियोनार्डो दा विंची की सबसे बड़ी कृतियाँ

लिओनार्दो 18 वर्ष तक मिलान में रहे। यही उन्होंने ‘लास्ट सपर’ नामक विश्वविख्यात चित्र का निर्माण किया था। सेण्टमेयिाडेल ग्रेजी गिर्जा की दीवार पर उन्होंने ईसा के अन्तिम आहार का यह चित्र अंकित किया था।लिओनार्दो के इस ‘लास्ट सपर’ चित्र की गणना विश्व के श्रेष्ठत्तम चित्रों में की जाती हैl लुई बारहवें ने इस चित्र को अपने साथ फ्रान्स ले जाने कोशिश भी की थी लेकिन इसे दीवार से निकालने का कोई तरीका नहीं खोजा जा सका।मिलान में लिओनार्दो ने और भी कई चित्र बनाये जिनमें ‘वर्जिन आफ दि राक्स’ भी सम्मिलित है। मिलान में उन्होंने एक ‘संस्कृति-संसद की स्थापना की थी lइसमें भाषण देने के लिए उन्होंने जो प्रारूप तैयार किये थे उनसे पता चलता है कि संसद का उद्देश्य शिल्पकला और उससे सम्बन्धित विज्ञान को बढ़ावा देना था ।

1500 ई० से लेकर 1506 तक वे फ्लोरेन्स में रहे। इस अवधि की उनकी महत्त्वपूर्णा कृतियां है-सेण्ट एन्न और मडोना जैसे महान पेंटिग्स बनाई l यहां उनकी रूचि भूगोल की ओर हो गई।समुद्र के ज्वार-भाटा विषय को लेकर वे अनुसंधान करने लगे।इसके साथ ही अर्नो नदी से नहर निकालने अैर सिविल इंजीनियरिंग के संबध में भी कई परियोजनाएं उन्होंने लोगों के सामने रखी. इस समय उनके अध्ययन के विषयों मे एक विषय रेखागणित भी था।

सन् 1507 ई० में फ्रांस के राजा बारहवे लुई ने उन्हें दरबार का चित्र शिल्पी नियुक्त किया. 1513 में वे रोम आये और पोप के साथ साक्षात्कार लिया. पोप ने उनका स्वागत किया और कुछ काम भी दिये.किन्तु उनके इस समय के बनाये हुए चित्रों में ‘मैडोना’ और ‘एक बालक’ के एक चित्र के सिवा अन्य चित्र उपलब्ध नहीं हैं।

सन् 1516 में लियोनार्दो अपने शिष्य के साथ इटली से विदा होकर फ्रान्स चले आये फिर स्वदेश नहीं लौटे।फ्रान्स में उनके दिन आराम से कटने लगे. फ्रान्स का राजा उनका गुणग्राही था. इस समय लिओनार्दो की उम्र लगभग 64 वर्ष की हो चुकी थी।कुछ सयम बाद उनकी तबीयत भी खराब रहने लगी।लकवे से उनका दाहिना हाथ पंगु हो गया था इसलिए किसी नये चित्र में हाथ नहीं लगाया। 1519 ई० में उन्होंने एक वसीयतनामा लिख कर अपनी संपत्ति का उत्तराधिकारी अपने भाई और अपने प्रिय शिष्य मेलजी को बनाया।उसी 1519 साल मई महीने में उनकी मृत्यु हो गयी।

लियोनार्दो द विंसी की मशहूर पेंटिंग्स

  • मोनालिसा
  • द लास्ट सपर
  • सेल्वाटर मुंडी
  • द वर्जिन एंड चाइल्ड विद् सेंट एन
  • मडोना आफ द यॉर्नविंडर
  • बेकस
  • बेनोइस मडोना
  • ड्रेफस मडोना
  • ल बेले फेरोनियरे
  • लेडी विद् एन अरमाइन
  • लीडे एंड द स्वान
  • लिट्टा मडोना
  • मडोना आफ द कारनेशन
  • पोट्रेट आफ द म्यूजिशियन
  • पोट्रेट आफ जिनवेरा ड बेंसी
  • सेंट जिरोम इन द डेजर्ट
  • सेंट जॉन द बापटिस्ट
  • द एर्डोसन आफ द मेगी
  • द एन्यूएशन
  • द वर्जिन आफ द रॉक्स, लंदन
  • द वर्जिन आफ द रॉक्स, लूव
  • द बैटल आफ अघीआरी

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