मनमोहन सिंह का जीवन परिचय

डॉ मनमोहन सिंह

मनमोहन सिंह भारत के 14 वें प्रधानमंत्री रहे चुके हैं , वे एक प्रतिभाशाली अर्थशास्त्री, महान विद्वान् व विचारक है।लोकसभा चुनाव 2009 में मिली जीत के बाद वे जवाहरलाल नेहरू के बाद भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री बने, जिन्हे पाँच साल का कार्यकाल सफलता पूर्वक पूरा करने के बाद लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने का अवसर प्राप्त हुआ था। साथ ही मनमोहन सिंह पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जो सरदार थे। मनमोहन जी विनम्र, नैतिक व महान नैतिक मूल्यों वाले इन्सान है।

नाम
मनमोहन सिंह
जन्म26 सितम्बर, 1932
जन्म स्थानगाह, पाकिस्तान
पितागुरुमुख सिंह
माताअमृत कौर
पत्नीगुरशरण कौर
बेटीउपिन्दर
दमन
अमृत
राजनैतिक पार्टी कांग्रेस

मनमोहन सिंह का जन्म और प्रारंभिक शिक्षा

मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितम्बर 1932 को गाह (पंजाब) में हुआ था,जो अब पाकिस्तान में आता है, मनमोहन सिंह का जन्म सिख्ख परिवारी में हुआ था। मनमोहन सिंह के पिता का नाम गुरुमुख सिंह और मां का नाम अमृत कौर था, बचपन में ही इनकी माता का निधन हो गया था, जिसके बाद उनकी दादी ने इनको पालापोषा किया, बचपन से ही मनमोहन सिंह तेज दिमाग के थे, उनका पढने में बहुत मन लगता था, इस वजह से वे हर साल क्लास में टॉप किया करते थे।

आजादी के समय हिंदुस्तान पाकिस्तान विभाजन के बाद उनके परिवार को अमृतसर आना पड़ा।फिर आगे की पढ़ाई मनमोहन सिंह ने यही की, अमृतसर के हिंदु कॉलेज में उन्होंने दाखिला ले लिया, ग्रेजुएशन के लिए मनमोहन सिंह चंड़ीगढ़ चले गए, जहाँ उन्होंने पंजाब युनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन पुरा किया।आगे की पढाई के लिए वे कैंब्रिज व ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी चले गए।मनमोहन जी ने 1962 में न्यूफील्ड कॉलेज,ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से डी.फिल किया। 1964 में उन्होंने “इंडिया एक्सपोर्ट ट्रेंड एंड प्रॉस्पेक्टस फॉर सेल्फ ससटेंड ग्रोथ” नाम से पुस्तक लिखी जिसे क्लेरेंडॉन प्रेस ने प्रकाशित की. मनमोहनजी पंजाब यूनिवर्सिटी में वर्षो तक शैक्षणिक प्रत्यायक के रूप में चमकते रहे।एक संक्षिप्त कार्यकाल में UNCTAD सचिवालय के रूप में अच्छी तरह से इन वर्षो में दिल्ही स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में प्रतिष्ठित हुए।

मनमोहन सिंह की शादी व बच्चे

सन 1958 में मनमोहन सिंह ने गुरुशरण कौर के साथ शादी की, जिससे उनको 3 बेटियां उपिन्दर, अमृत व दमन है। उनकी बेटी उपिन्दर दिल्ली युनिवर्सिटी में इतिहास की प्रोफेसर है।दूसरी बेटी अमृत अमेरिकन सिविल लिबर्टी में काम करती है।तीसरी बेटी दमन एक हाउसवाइफ है, जिन्होंने आईपीएस ऑफिसर से शादी की है।

मनमोहन सिंह का करियर

मनमोहन सिंह ने अपनी पढाई पूरी करने के बाद भारत लौट कर वे पंजाब यूनिवर्सिटी व दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में प्रोफेसर बन गए। 1971 में भारत सरकार द्बारा मनमोहन सिंह जी को आर्थिक सलाहकर वाणिज्य मंत्रालय के लिए नियुक्त किये गए, इसको देखते हुए 1972 में उन्हें मुख्य सलाहकार, वित्त मंत्रालय में नियुक्त किया गया। इनकी नियुक्ति बहुत से पदों के लिए हुई जैसे की वित्तमंत्री, उपसभापति, योजन मंत्री, रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में, प्रधानमंत्री के सलहाकार के रूप में 1991 से 1996 के बिच पाच वित्त मंत्रीयो ने मिलकर आर्थिक मंदी हटाकर भारत को पुन्ह स्थापीत किया। राजनीती में आने से पहले मनमोहन सरकारी नौकरी किया करते थे, जहाँ उन्हें उनके काम के लिए बहुत से सम्मान मिले। कुछ समय बाद उन्होंने नौकरी छोड़ देना का फैसला किया और राजनिति में आने का ठान लिया।

मनमोहन सिंह का राजनितिक करियर

सन 1991 में मनमोहन सिंह जी ने सरकारी नौकरी छोड़ राजनीती में कदम रखा। इस समय पी वी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री चुने गए थे, उन्होंने अपने कैबिनेट मंत्रालय में मनमोहन सिंह जी को वित्त मंत्री बना दिया। इस समय भारत बहुत बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा था, मनमोहन सिंह जी ने देश की अर्थवयवस्था सुधारने के लिए कई देशों के दौरे किये। उन्होंने सबसे पहले सत्ता में आते ही ‘लायसेंस राज’ नाम की योजना को बंद किया, इसके अंतर्गत किसी भी बिजनेस में अगर कोई बदलाव होता है, तो उसके लिए सरकार की अनुमति लेनी होगी।इस योजना से कई प्राइवेट फ़र्म को फायदा मिला, उन्हें स्वतंत्र बनाने से देश को आर्थिक फायदा मिलने लगा।

1998 में मनमोहन सिंह जी राज्यसभा के सदस्य चुने गए, और 1998 से 2004 तक वे राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे। सन 2004 में हुए आम चुनाव में UPA सरकार की जीत हुई, इस जीत के बाद कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने मनमोहन सिंह जी को भारत का अगला प्रधानमंत्री घोषित किया।उस समय मनमोहन सिंह जी लोकसभा के सदस्य भी नहीं थे, बहुत कम भारतवासी उन्हें जानते पहचानते थे राजनीती में वे साफ छवि रखते थे, उन्होंने कभी गन्दी राजनीती नहीं खेली, जिस वजह से हर भारतवासी ने उन्हें दिल से अपनाय।22 मई 2004 को मनमोहन सिंह जी ने प्रधानमंत्री पद की शपत ली और उस पद को संभाला। वित्त मंत्री पी चिदम्बरम के सहयोग से मनमोहन सिंह ने व्यापार और अर्थव्यवस्था के विकास की दिशा में काम किया।

एक अच्छे अर्थशास्त्री होने के नाते उन्होंने देश की अर्थवयवस्था पर पूरा ध्यान दिया, और उस मंत्रालय का काम अपनी देख रेख में ही रखा।अपने वित्त मंत्री पी चिदंबरम के साथ मिल कर उन्होंने देश का मार्किट व अर्थवयवस्था को आगे बढ़ाया।

सन 2007 में भारत की हाईएस्ट ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) की ग्रोथ 9% तक बढ़ गई, जिसके साथ भारत दुनिया का दुसरे नंबर का अर्थवयवस्था ग्रोथ वाला देश बन गया. मनमोहन जी प्रधानमंत्री होने के नाते बहुतसी योजनायें भी शुरू की, उन्होंने ग्रामीण जनता के कल्याण के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना की शुरुवात की. इस योजना के लिए मनमोहन जी की देश विदेश सभी जगह बहुत सराहना हुई।मनमोहन जी की सरकार के पहले देश में शिक्षा के हालात बहुत ख़राब थे। मनमोहन जी ने शिक्षण क्षेत्र में सुधार के लिए बहुत मेहनत की. इस दौरान शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव भी आये।UPA सरकार ने गाँव व छोटी जाति, जनजाति में हायर शिक्षा के लिए अभियान भी चलाया. उस समय कुछ पार्टी आरक्षण के खिलाफ थी, वे मेरिट में आये सभी बच्चों को योग्यता के अनुसार न्याय दिलाना चाहती थी।

डॉ मनमोहन सिंह की सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ कड़े कानून बनाये। 2008 में मुंबई में हुए आतकंवादी हमले के बाद मनमोहन जी ने नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (NIA) का गठन किया, जो आंतकवाद पर कड़ी नजर रखती थी।2009 में इ गवर्नस की सुविधा दी गई, जिससे नेशनल सिक्यूरिटी बढ़ गई, मल्टीपरपस आइडेंटिटी कार्ड बनाये गए, जिससे देशवासियों को सुविधा होने लगी. मनमोहन सिंह जी ने अपने शासनकाल में पड़ोसी देशों व अन्य देशों से संबद्ध सुधारे जिससे देश को बहुत से फायदे हुए।

15वी लोक सभा के चुनाव नतीजे यूपीए के लिए बहुत सकारात्मक रहे और मनमोहन सिंह को 22 मई 2009 को एक बार फिर से भारत के प्रधानमंत्री के पद पर चुना गया। जवाहरलाल नेहरु के बाद मनमोहन सिंह एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्हें 5 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद फिर से प्रधानमंत्री चुना गया।

मनमोहन सिंह को मिले अवार्ड्स व अचीवमेंट

  • वर्ष 1952 में मनमोहन सिंह को पंजाब विश्वविद्यालय द्वारा (ऑनर्स इकोनॉमिक्स) विषय से बी. ए. में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर विश्वविद्यालय पदक से सम्मानित किया।
  • वर्ष 1954 में पंजाब विश्वविद्यालय ने उन्हें (अर्थशास्त्र) विषय से एमए में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर “उत्तर चंद कपूर पदक” से सम्मानित किया।
  • वर्ष 1956 में उन्हें कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, यूके द्वारा “एडम स्मिथ” पुरस्कार से नवाजा गया।
  • सन 1982 में कैंब्रिज के जॉन कॉलेज ने मनमोहन सिंह को को सम्मानित किया।
  • वर्ष 1983 में पंजाब विश्वविद्यालय द्वारा “डॉक्टर ऑफ लेटर्स” पुरस्कार से सम्मानित किया।
  • वर्ष 1987 में भारत सरकार द्वारा “पद्म विभूषण” पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • वर्ष 1994 में लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स ने प्रतिष्ठित अध्येता के रूप में उन्हें चुना गया।
  • वर्ष 2002 में भारतीय संसदीय समूह द्वारा उन्हें “उत्कृष्ट सांसद” पुरस्कार से नवाजा गया।
  • वर्ष 2005 में मनमोहन सिंह को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने “डॉक्टर ऑफ सिविल लॉ” की मानद उपाधि से सम्मानित किया।
  • वर्ष 2005 में टाइम मैगज़ीन द्वारा विश्व के शीर्ष 100 प्रभावशाली लोग में शामिल किया गया।
  • वर्ष 2006 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने उन्हें डॉक्टर ऑफ सिविल लॉ की मानद उपाधि से सम्मानित किया।
  • वर्ष 2009 में पंजाब विश्वविद्यालय ने इकोनॉमिक डिपार्टमेंट में डॉक्टर मनमोहन सिंह चेयर बनाई।
  • 2010 में उन्हें एक फाउंडेशन ने वर्ल्ड स्टेटमैन अवार्ड से नवाजा।

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