देश के महान “गणितज्ञ” पाइथागोरस का जीवन परिचय

Pythagoras

छठी शताब्दी ईसापूर्व में धार्मिक शिक्षण और दर्शन में पायथागोरस का महत्वपूर्ण स्थान रहा। पायथागोरस का मानना था कि सबकुछ गणित से संबंधित है और संख्या ही वास्तविकता है, जिनके माध्यम से हर चीज के बारे में भविष्यवाणी की जा सकती है।

पाइथागोरस कौन है?

पाइथागोरस प्राचीन यूनान के एक महान गणितज्ञ और दार्शनिक थे। गणित के क्षेत्र में इन्हें आज भी ‘पाइथागोरस का प्रमेय’ (Pythagoras Theorem) के लिए ख्याति प्राप्त है। हालाँकि गणित के क्षेत्र में योगदान से इत्तर पाइथागोरस को एक संगीतकार, रहस्यवादी, वैज्ञानिक और धार्मिक आंदोलन के संस्थापक के तौर पर भी पश्चिम के इतिहास में सम्मान प्राप्त है। उन्होंने पायथागोरियन पंथ की स्थापना की थी जिसके क्रियाकलाप बहुत ही गुप्त होते थे।

जीवन से जुड़ी विशेष जानकारी, समर्पण सहित आगामी विचार व्यवस्था –

पूरा नाम पाइथागोरस (ऐतिहासिक आलेखों के अनुसार)
पेशा दार्शनिक और गणितज्ञ गणितज्ञ
जन्म 570 ईसा पूर्व, सामोस, यूनान
मृत्यु 495 ईसा पूर्व (मेतापोंतम)
राष्ट्रीयता यूनानी
पिता का नाम मनेसार्चस
माता का नाम पयिथिअस
पत्नी का नाम थेनो
शिक्षा पैथोगोरियंस
कार्य और उपलब्धि गणित के क्षेत्र में दुनिया को ‘पाइथागोरस का प्रमेय’ की देन के साथ दार्शनिक शिक्षा

पाइथागोरस का प्रारंभिक जीवन

पाइथागोरस का जन्म 570 ईसा पूर्व में यूनानी द्वीप सामोस में हुआ था। ऐसा माना जाता है, कि उनका पिता मनेसार्चस लेबनान स्थित टायर के एक व्यापारी थे और माँ पयिथिअस उस द्वीप की मूल निवासी थीं, जो रत्नों का व्यापार करते थे, ऐसा भी कहा जाता है, कि पाइथागोरस के दो या तीन भाई-बहन भी थे। पाइथागोरस का बचपन का ज्यादातर समय सामोस में ही व्यतीत हुआ था।

पाइथागोरस की शिक्षा

पाइथागोरस ने सीरिया और इटली के कुछ प्रसिद्ध विद्धानों से शिक्षा भी ग्रहण की। पाइथागोरस अपनी यात्राओं के दौरान अलग-अलग देशों के विद्धानों से शिक्षा ग्रहण करते थे। और इसी दौरान उन्होंने ज्यामितीय के सिद्धान्तों का अध्ययन भी किया था।

पाइथागोरस ने सीरिया के विद्धानों से महत्वपूर्ण विषयों पर ज्ञान प्राप्त करने के अलावा शल्डिया के विद्धानों को भी अपना गुरु बनाया और महत्वपूर्ण विषयों पर ज्ञान प्राप्त किया। आपको बता दें कि, पाइथागोरस को शुरु से ही पढ़ने -लिखने में बेहद रुचि थी, इसलिए हर समय वे ज्ञान अर्जित करने में लगे रहते थे, उन्होंने शिक्षा अपने शिक्षक फेरेसायडस से ली थी, जिनसे उन्होंने दर्शनशास्त्र की शिक्षा प्राप्त हुई।

पाइथागोरस का पारिवारिक जीवन

पाइथागोरस की शादी थेनो नाम की एक दार्शनिक महिला से हुई थी। पाइथागोरस के तीन बेटियां और एक बेटा भी था। ऐसा भी उल्लेखित है, कि जब पाइथागोरस के धार्मिक पंथ में दो अलग-अलग गुटों में बंट गए थे, तब उनमें से एक गुट का नेतृत्व उनकी पत्नी थेनो और उनकी बेटियों ने किया था।

पाइथागोरस का करियर

पाईथागोरस ने अपनी विश्वविख्यात प्रमेय का आरम्भ किया और इस प्रमेय के प्रयोगात्मक प्रदर्शन भी किया। वास्तव में यदि कहा जाए तो पाईथागोरस ही वह प्रथम व्यक्ति थे। जिन्होंने ज्यामितीय की प्रमेयो के लिए उत्पति प्रणाली की नीव डाली। यह भी कहा जाता है, कि पाईथागोरस ने यह भी सिद्ध करके दिखाया कि किसी भी त्रिभुज के तीनो अंत:कोणों का योग दो समकोण के बराबर होता है।

वे फोनेशिया में टायर और बैब्लोस में शिष्य बन कर भी रहे। इजिप्ट में उन्होंने कुछ ज्यामितीय सिद्धांतों को सिखा जिससे प्रेरित होकर उन्होंने अंततः प्रमेय दी जो अब उनके नाम से जानी जाती है। इस प्रमेय के अनुसार किसी समकोण त्रिभुज में दो भुजाओं के वर्गो का योग तीसरी भुजाओं का योग तीसरी भुजा के वर्ग के बराबर होता है।

समकोण त्रिभुज में यदि एक भुजा की लम्बाई तीन सेमी हो और दुसरी भुजा की लम्बाई चार सेमी हो तो कर्ण की लम्बाई पांच सेमी होगी। अभिप्राय यह है, कि तीन सेमी की भुजा में एक एक सेमी के नौ वर्ग होंगे और चार सेमी की भुजा में एक सेमी के सोलह वर्ग होंगे। अर्थात इन दोनों का योग 25 होता है। इस प्रकार सबसे लम्बी भुजा में 25 वर्ग होंगे अर्थात उस भुजा की लम्बाई पांच सेमी होगी।

पाइथागोरस दर्शन सिद्धांत क्या है?

वो इस बात को मानते थे कि मौत के बाद इंसान की आत्मा जन्नत को जाती है लेकिन अगर जन्नत ना जाये तो किसी और शरीर को धारण कर लेती है चाहे वो इंसान का शरीर हो या फिर जानवर का शरीर हो। जो लोग पाइथागोर को फॉलो करते थे उन्हें पाइथागोरस कहा जाता था।

चाहे उनके विश्वास कुछ अलग थे और कुछ मूर्खतापूर्ण भी थे लेकिन साइंस और गणित में उनका योगदान किसी महानता से कम नही था।

पाइथागोरस प्रमेय क्या है?

Pythagoras Theorem

पाइथागोरस प्रमेय के बारे में तो आपने सुना ही होगा जी हां वो ही a² + b² = c² की एक समकोण त्रिभुज में समकोण की सामने वाली भुजा का वर्ग अन्य दो भुजाओ के वर्ग के योग के बराबर होता है। वेसे इस थ्योरी पर विवाद भी है क्योंकि यह भी माना जाता है कि पाइथागोरस प्रमेय को इससे भी पहले बेबीलोन और भारतीयों द्वारा खोज लिया गया था।

पाइथागोरस का मानना था कि ज्योमिति गणित में सर्वश्रेष्ठ है और ज्योमिति से ही दुनिया की व्याख्या की जा सकती है। पाइथागोरस ने 10 को पूर्ण संख्या माना था।

पाइथागोरस संगीत सिद्धांत

उन्होंने संगीत में भी कार्य किया था क्यूंकि उनको संगीत में भी रुचि थी। वे जीवन के लिए संगीत को जरूरी मानते थे। उन्होंने संगीत के नोट को गणित में अनुवाद किया था। उनका मानना था कि संगीत या ध्वनि का हर नोट को गणित में व्याख्या कर सकते है।

पाइथागोरस उनमे से थे जो यह मानते थे कि पृथ्वी गोल है और सभी ग्रह किसी केंद्र के चारो और चक्कर लगा रहे है। उनका यह भी मानना था कि मानव जीवन और मानव शरीर एक स्थिर अनुपात में होते है इनमे कुछ भी कम या ज्यादा हो जाये तो असन्तुलन पैदा होता है जिससे मानव शरीर बीमारी से ग्रस्त हो जाता है।

पाइथागोरस का स्कूल की स्थापना करना

ईसा से 532 वर्ष पूर्व उन्होंने उन्होंने समोस के अत्याचारी शासन से छुटकारा पाने के लिए इटली भागना पड़ा। वहा उन्होंने ईसा पूर्व 529 मे crotonay मे एक स्कूल की स्थापना की। जल्द ही इस स्कूल मे लगभग 300 छात्रों ने दाखिला लिया। यह स्कूल वास्तव मे एक धार्मिक संस्थान था। इस स्कूल मे मुख्य रूप से चार विषय ही पढ़ाया जाता था्।

अंकगणित, संगीत, ज्योतिष विज्ञान और ज्यामिति। पाइथागोरस का विचार था की मनुष्य को पवित्र जीवन बिताना चाहिए। उनका विचार था की पवित्र जीवन द्वारा ही आत्मा को शरीर के संबधो से मुक्त किया जा सकता है।

पाइथागोरस के धार्मिक केन्द्र के बेहद सख्त नियम थे –

पाइथागोरस के धार्मिक केन्द्र के रुल्स बेहद सख्त थे, जिनका इन अनुयायियों को सख्ती के साथ पालन करना पड़ता था। इस स्कूल के अंदर रहने वाले लोग सिर्फ शाकाहारी खाना ही खा सकते थे, उनकी कोई प्राइवेट संपत्ति भी नहीं होती थी, जबकि इस केन्द्र के आसपास रह रहे छात्र जो सिर्फ केन्द्र में पढ़ाई के लिए आते थे, उन्हें अपने घर में खाने की छूट थी, ऐसे छात्र अकउस्मेतिकोई कहलाते थे।

वहीं दुनिया के इस महान गणितज्ञ पाइथागोरस के धार्मिक स्कूल के अंदर रहने वाले लोगों का नाम दुनिया के पहले संयासी के रुप में इतिहास में भी उल्लेखित है।

धार्मिक पंथ में भेदभाव की वजह से बने दो अलग-अलग ग्रुप-

महान गणितज्ञ पाइथागोरस ने अपने धार्मिक मठ में शांति बनाए रखने के लिए एकेमैथिया नियम लागू किया था, इस सख्त नियम का पालन नहीं करने वालों को मौत की सजा का प्रावधान था। यही नहीं इतिहास में ऐसी व्याख्या की गई है कि उनके धार्मिक पंथ में अनुयायियों के साथ भेदभाव किया जाता था, मठ के वे शिष्य जो सिर्फ अध्ययन करने के लिए आते थे, उन्हें पाइथागोरस को देखने तक की अनुमति नहीं थी और ना ही उन्हें पंथ के गुप्त रहस्यों के बारे में बताया जाता था।

धार्मिक पंथ में इस तरह के भेदभाव से शिष्यों के बीच ईर्ष्या की भावना पैदा हो गई थी और बाद में मठ के अंदर रहने वाले और बाहर से आने वाले विद्यार्थियों दोनों का ग्रुप अलग-अलग हो गया। पाइथागोरस मे अंको के सिद्धांत पर काम किया. इसके अतरिक्त उन्होंने गणित और संगीत के बिच सम्बन्ध भी स्थापित किया।

पायथागोरस के विचार बहुमुखी थे और उन्हें कई वर्गों में बाँटा जा सकता है—

  • खगोलशास्त्र व संगीत अति गहन विषय हैं और इनकी प्रकृति गणितीय है।
  • आत्मिक शुद्धि के लिए दर्शन का प्रयोग किया जाता है।
  • आत्मा ऊपर जाकर दैव से मिलती है।

पाइथागोरस की मृत्यु

दुर्भाग्यवश पाइथागोरस विचारों के अनुनाई होने के कारण राजनीति मे कूद पड़े. उन्हें जहाँ भी मौका मिलता था। वह अपना अधिकार जमाने की कोशिश करते। इससे उनका पतन हो गया और लोग उनके विरोधी हो गए।

जिसके कारण पाइथागोरस को देश से निकला दे दिया गया। 80 वर्ष की आयु मे उनकी मृत्यु हो गयी।उनकी मृत्यु के 200 वर्ष बाद पाइथागोरस का रोम की सेनेट मे विशाल मूर्ति बनवाई गयी। और इस महान मैथमेटिशियन को यूनान के महानतम व्यक्ति का सम्मान दिया गया।

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