वीजा के लिए रिश्वत : सीबीआई ने रिश्वत मामले में कार्ति चिदंबरम के करीबी सहयोगी भास्कररमन को गिरफ्तार किया

नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार 18 मई को कांग्रेस नेता कार्ति पी चिदंबरम के एक करीबी सहयोगी को वीजा भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया है। Bribery for visa

गिरफ्तारी के एक दिन बाद सीबीआई की टीमों ने चेन्नई और दिल्ली में चिदंबरम के आवासों सहित देश के कई शहरों में 10 स्थानों पर समन्वित तलाशी अभियान चलाया। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, एक टीम ने वीजा भ्रष्टाचार के चल रहे एक मामले में कांग्रेस नेता कार्ति पी चिदंबरम के करीबी सहयोगी एस भास्कर रमन को देर रात पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया।

सीबीआई ने लोकसभा सदस्य कार्ति चिदंबरम के खिलाफ एक बिजली कंपनी के लिए कथित तौर पर 50 लाख रुपये रिश्वत लेने के बाद 263 चीनी नागरिकों के वीजा की सुविधा के लिए एक नया मामला दर्ज किया। अधिकारियों के मुताबिक, यह 11 साल पहले किया गया था जब उनके पिता पी चिदंबरम केंद्रीय गृह मंत्री थे।

सीबीआई की छापेमारी के तुरंत बाद कार्ति ने बिना निर्दिष्ट किए ट्वीट किया

कार्ति बोले- यह कितनी बार हुआ, मैं भूल गया हूंमंगलवार को हुई कार्रवाई के दौरान कार्ति चिदंबरम ने ट्वीट कर तंज किया। उन्होंने कहा कि यह (CBI की कार्रवाई) कितनी बार हुआ है, मैं गिनती भी भूल गया हूं।CBI arrests Karti Chidambaram’s close aide Bhaskarara इसका एक रिकॉर्ड होना चाहिए। बता दें कि CBI ने 2010-2014 के बीच के इस मामले में नया केस दर्ज किया है। उसी मामले में मंगलवार को छापे की कार्रवाई की गई।” बाद में, उन्होंने आगे ट्वीट किया कि उनके कार्यालय ने उन्हें खोजों के बारे में अपडेट किया है। “मेरे कार्यालय ने 2015 में दो बार ‘रिकॉर्ड’ पर अपडेट किया है, 2017 में एक बार, 2018 में दो बार।

ये हैं पूरा मामला

अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में सीबीआई ने आरोप लगाया है कि कार्ति चिदंबरम को यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान 1980 मेगावाट की तलवंडी साबो बिजली परियोजना के लिए जुलाई-अगस्त 2011 में चीन के 263 कर्मचारियों को वीजा दिलवाने के लिए 50 लाख रुपये की रिश्वत मिली थी। उस समय पी. चिदंबरम देश के वित्त मंत्री थे। साथ ही अधिकारियों ने बताया कि पंजाब के मानसा में बिजली परियोजना की स्थापना के लिए चीन की एक कंपनी के साथ अनुबंध किया गया था, लेकिन उसका काम तय समय से पीछे चल रहा था। परियोजना के लिए कामगारों की जरूरत थी, लेकिन सीमित संख्या में ही विदेशी नागरिकों को वर्क परमिट दिया जा सकता था। आरोप है कि कंपनी ने कार्ति से संपर्क किया, जिन्होंने अपने प्रभाव का फायदा उठाते हुए अधिकृत संख्या का उल्लंघन कर वीजा दिलवाया।

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