Mutual Funds, Meaning , What is Mutual fund

चुअल फंड (Mutual Fund) सिर्फ शेयर बाजार में ही निवेश का मौका नहीं देता है बल्कि कई अन्य तरह के भी निवेश के मौके देता है। म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) की एक कैटागरी होती है डेट म्‍युचुअल फंड (Debt Mutual Fund) की। इस कैटेगरी में निवेश किया गया पैसा सरकारी और निजी कंपनियों के बांड में निवेश किया जाता है। इस कारण यहां पर करीब करीब बैंक की तरह ही निवेश की सुरक्षा मिलती है। इसके अलावा म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund)

इनकम टैक्‍स बचाने का भी मौका देते हैं। हालांकि लोगों को लगता है कि म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) केवल शेयर बाजार में

कैसे बन जाता है करोड़ों का फंड
अगर म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में कोई रोज 100 रुपये यानी 3000 रुपये महीने का निवेश हर माह करे तो आसानी से करोड़पति बना जा सकता है। इस निवेश को 30 साल के लिए चलाना होगा। यहां पर माना गया है कि रिटर्न औसतन 12 फीसदी मिला है। ऐसे में यह 3000 रुपये निवेश आराम से करीब 1 करोड़ रुपये बन जाएगा।

Mutual fund

इस प्रकार कहा जा सकता है कि म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) निवेश का स्‍मार्ट जरिया हैं, जिसका फायदा लोग अपनी रिस्क लेने की क्षमता के अनुसार उठा सकते हैं। यही नहीं म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में 500 रुपये महीने जैसे अकाउंट से भी निवेश की शुरुआत की जा सकती है।

अच्छा रिटर्न देने वाले टॉप 5 म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund)

-SBI Small Cap Fund ने दिया है 5 साल में औसतन 27.44 फीसदी का रिटर्न। 
-Canara Robeco Emerging Equities Fund ने दिया है पिछले 5 साल में औसतन 25.75 फीसदी का रिटर्न। 
-Mirae Asset Emerging Bluechip Fund ने दिया है पिछले 5 साल में औसतन 25.36 फीसदी का रिटर्न। 
-Reliance Small Cap Fund ने दिया है पिछले 5 साल में औसतन 24.99 फीसदी का रिटर्न। 
-ICICI Prudential Banking and Financial Services Fund ने दिया है करीब 23.20 फीसदी का रिटर्न।

रिस्‍क लेने की क्षमता के हिसाब से चुने म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund)

म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) रिस्‍क लेने की क्षमता के हिसाब से निवेश के विकल्प देता है। म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) को तीन कैटेगि‍री हाई रि‍स्‍क, मीडि‍यम रि‍स्‍क और लो रि‍स्‍क की कैटेगरी में बांटा जा सकता है।

  • अगर कोई म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) खरीदते समय हाई रि‍स्‍क का ऑप्‍शन लेता है तो आपका रि‍स्‍क बहुत ज्‍यादा होगा, लेकि‍न इसमें फायदा यह है कि‍ आपको अगर फायदा हुआ तो रि‍टर्न भी बहुत अच्‍छा मि‍लेगा।
  • हाई रि‍स्‍क कैटेगरी म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) : इस कैटेगरी में मिड और स्मॉल कैप कैटेगरी को रखा जा सकता है।
  • मीडि‍यम रि‍स्‍क कैटेगरी म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) : इस कैटेगरी में लार्ज कैप फंड को रखा जा सकता है।
  • लो रि‍स्‍क कैटेगरी म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) : इस कैटेगरी में डेट म्युचुअल फंड (Debt Mutual Fund) को रखा जा सकता है।

इनकम टैक्‍स (income tax) बचाने के लिए भी कर सकते हैं निवेश

म्‍युचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश करके इनकम टैक्‍स (income tax) भी बचाया जा सकता है। जब काई टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड (Tax saving Mutual Fund) में निवेश करता है तो उसे इनकम टैक्स एक्ट (income tax act) की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है।

टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड (Tax saving Mutual Fund) में 3 साल का लॉकइन

टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड (ELSS) में 3 साल तक यह पैसा लॉकइन पीरि‍यड में होता है। इस लॉकइन पीरि‍यड के दौरान आप अपना पैसा निकाल नहीं सकते हैं। हालांकि देश में जितने भी इनकम टैक्‍स (income tax) बचाने वाले तरीके हैं, उनमें सबसे कम लाॅइकन पीरियड टैक्‍स सेविंग म्‍युचुअल फंड (elss) में ही है।

Mutual Fund) में निवेश के फायदो का फार्म्यूला है SIP म्‍युचुअल फंड

(Mutual Fund) में निवेश में दो विकल्‍प मिलते हैं। एक में पैसा एक साथ लगा सकते हैं, जबकि दूसरे में हर माह निवेश का विकल्‍प का मिलता है। इसे सिस्‍टेमैटिक इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान (SIP) कहते हैं। अगर आपके पास एक साथ बड़ी रकम नहीं है तो आप सि‍स्‍टमैटि‍क इनवेस्‍टमेंट प्‍लान (SIP) के माध्‍यम से निवेश शुरू कर सकते हैं। म्‍युचुअल फंड की कई स्‍कीम 500 रुपये महीने से निवेश की शुरुआत की जा सकती है।

ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी एसेट (Asset Management Company)

(AMC) मैनेजमेंट कंपनी वह कंपनी होती है जो अलग-अलग प्रकार की म्यूचुअल फंड (Mutual fund) स्कीम लेकर बाजार में आती हैं। जैसे रिलायंस ग्रोथ फंड (म्यूचुअल फंड स्कीम) को रिलायंस कैपिटल ऐसेट मैनेजमेंट लिमिटेड ने लॉन्च किया, जो एक एएमसी यानी ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी है।

पोर्टफोलियो मैनेजर (Portfolio Manager)

एक बार अगर आपका पैसा म्यूचुअल फंड (Mutual fund) स्कीम में चला गया, तब उस धन का प्रबंधन पोर्टफोलियो मैनेजर करते हैं। वे आपके धन को शेयर या फिर बॉन्ड में निवेश करते हैं, यह निवेश आपकी स्कीम कैसी है उस पर निर्भर करता है। अगर स्कीम के नजरिये से देखा जाये तो उनके निर्णय बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि वे सिर्फ आपका नहीं, बल्कि आपके जैसे हजारों लोगों के धन का प्रबंधन करता है।

म्‍युचुअल फंड इंट्री लोड (MF Entry load)

म्‍युचुअल फंड इंट्री लोड एक महत्वपूर्ण शब्द है, जो हर म्यूचुअल फंड (Mutual fund) निवेशक के सामने आता है। एंट्री लोड और एक्ज‍िट लोड यानी जब आप निवेश कर रहे हैं, उस वक्त पड़ने वाला शुल्क और जब आप स्कीम से बाहर निकल रहे हैं, उस वक्त पड़ने वाला शुल्क। जब आप म्यूचुअल फंड (Mutual fund) खरीदते हैं तब कई बार आपको एनएवी से ज्यादा पैसा देना पड़ता है, और बेचते वक्त हो सकता है आपको कम एनएवी मिले।

म्‍युचुअल फंड पोर्टफोलियो (Mutual Fund Portfolio)

सभी शेयर और निवेश किया गया धन मिलकर पोर्टफोलियो बनता है, तो अगर कोई म्यूचुअल फंड स्कीम रिलायंस, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज ऑटो, आईडीबीआई बैंक और कुछ सरकारी बॉन्ड खरीदते हैं तो ये सभी एकत्र होकर एक पोर्टफोलियो बनते हैं।

एयूएम (AMU)

पूरा धन जो निवेश किया गया है, उस कुल धन को एसेट्स अंडर मैनेजमेंट यानी एयूएम कहते हैं. एयूएम (AMU) बाजार के वातावरण और निवेशकों के निवेश व धन निकालने की तीव्रता के हिसाब से घटता बढ़ता रहता है।

एसआईपी (SIP)

ज्यादातर ओपन एंडेड स्कीम में हर महीने छोटे-छोटे निवेश का विकल्प होता है। इसे सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान यानी सिप (SIP) कहते हैं। यह बैंक के आवर्ती जमा (RD) की तरह कार्य करती है। एनएफओ न्यू फंड ऑफर (NFO) म्यूचुअल फंड (Mutual fund) के नये ऑफर होते हैं जिनकी फेस वैल्यू आमतौर पर 10 रुपए होती है।

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