National voters day : इस वर्ष राष्ट्रीय मतदाता दिवस का इतिहास, थीम और समारोह क्या है ? क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय मतदाता दिवस? जानिए सारी जानकारी

राष्ट्रीय मतदाता दिवस

1950 में भारत के चुनाव आयोग की स्थापना के दिन को चिह्नित करने के लिए भारत हर वर्ष 25 जनवरी दिन को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाता है। मतदान सबसे महत्वपूर्ण अधिकारों में से एक है जो लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति के पास है। सभी नागरिक को वोट देने का अधिकार है और उन्हें इससे यह नियंत्रित करने में मदद करता है कि कौन शासन करेगा और आप अपने समुदाय या देश में किस प्रकार की विकास और कल्याण योजनाएं चाहते हैं। हालांकि, लाखों लोग अक्सर मतदान की जिम्मेदारी से कतराते हैं या उन कदमों से अनजान होते हैं, जिन्हें एक जागरूक नागरिक के रूप में उन्हें उठाने की आवश्यकता होती है। इसे ठीक करने और लोगों को मतदान के लिए पंजीकरण करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए हर वर्ष 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है।राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2022 एक महत्वपूर्ण उत्सव है क्योंकि विभिन्न प्रमुख राज्य चुनाव होने हैं।इतना ही नहीं 2024 में आम चुनाव भी होंगे। ऐसे में इन चुनावों में मतदाताओं की महत्वपूर्ण भागीदारी के लिए उन्हें शिक्षित करना और जागरूक करना बहुत आवश्यक है।

मतदाता दिवस की शुरुआत कब से हुई?

मतदाता दिवस की शुरुआत 25 जनवरी 2011 से की गई। 26 जनवरी 1950 को चुनाव आयोग ने काम करना शुरू किया था।राष्ट्रीय मतदाता दिवस की शुरुआत का मकसद ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं का सूची में नाम जोड़ना, युवाओं को मतदाता के लिए प्रोत्साहित करना है।

राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2022 ,बेहतरीन काम करने वालों को सम्मान किया जाएगा

राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद राष्ट्रीय पुरस्कार देंगे। मतदान से जुड़े बेहतरीन कार्य करने वाले राज्य और जिला स्तरीय ऑफिसर्स को सम्मानित किया जाएगा। कोविड-19 संकट में मतदान के दौरान नई तकनीक को बढ़ावा देने, सुरक्षा के उपाय करने, मतदाताओं को जागरूक करने वालों को भी सम्मानित किया जाएगा।

कैसे मनाया जाता है मतदाता दिवस ?

राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाने की हर वर्ष अलग अलग थीम होती है ।इस दिन सरकार मतदाताओं को जागरूक करने के लिए अभियान चलाती है।खासकर जो मतदाता पहली बार वोटर हैं, या जिनके नाम अब तक वोटर्स लिस्ट में नहीं हैं।इस दिन नेशनल अवॉर्ड से चुनाव प्रक्रिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले लोगों को सम्मानित किया जाता है। नए वोटर को वोट की अहमियत समझाई जाती है।

राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2022 इतिहास

अधिक युवा मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए 25 जनवरी, 2011 को पहली बार राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया गया था। तत्कालीन प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इस आशय के कानून मंत्रालय के एक प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने उस समय बताया कि 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाले नए मतदाता मतदाता सूची में नामांकित होने में कम रुचि दिखा रहे थे। सोनी ने कहा कि इस मुद्दे को हल करने के लिए, चुनाव आयोग ने पूरे भारत के सभी मतदान केंद्रों में प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी तक को 18 वर्ष की आयु तक पहुंचने वाले सभी युवा मतदाताओं की पहचान करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी प्रयास शुरू करने का फैसला किया गया था। ऐसे मतदाताओं का नामांकन किया जाएगा और उन्हें हर साल 25 जनवरी को चुनावी फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) दिया जाएगा।

राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2022 थीम

हर साल राष्ट्रीय मतदाता दिवस का उत्सव विभिन्न समर्पित विषयों के इर्द-गिर्द घूमता है। 2022 के राष्ट्रीय मतदाता दिवस की थीम ‘चुनावों को समावेशी, सुगम और सहभागी बनाना’ है। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू होंगे। हालाँकि, वह कोविड -19 से संक्रमित होने के बाद इस कार्यक्रम में शारीरिक रूप से शामिल नहीं होंगे और एक आभासी संदेश देंगे। केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू विशिष्ट अतिथि होंगे। आयोजन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में चुनाव के संचालन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों को वर्ष 2021-22 के लिए सर्वश्रेष्ठ चुनावी प्रथाओं के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार दिए जाएंगे। वहीं, आयोजन के दौरान नए नामांकित मतदाताओं को एपिक सौंपा जाएगा।

Koo ने मतदाता अधिकारों और जिम्मेदारियों पर बहुभाषी गाइड लॉन्च किया

राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर, माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म Koo ने पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान पहली बार मतदाताओं को सूचित निर्णय लेने के लिए मतदाता अधिकारों और जिम्मेदारियों पर एक बहुभाषी गाइड जारी किया है। उनके एक बयान के अनुसार, गाइड संविधान में निहित भारतीय मतदाता के मौलिक अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करता है, और उन जिम्मेदारियों की गणना करता है जिन पर मतदाताओं को वोट डालने से पहले और बाद में विचार करने की आवश्यकता होती है।

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