भारतीयों के लिए प्रेरणादाई महिला बनी मैरी कॉम की जीवन कहानी

“मंजिलें उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौंसले से ही उड़ान होती है।”

Mary com

मेरी कॉम कौन है?

मैरी कॉम ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला मुक्केबाजी के लिए पदक जीतने वाले पहली महिला बॉक्सर है। उन्होने 2001 में पहली बार राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीती। मेरी ने 2012 में हुए ओलंपिक में क्वालीफाई किया था, और ब्रोंज मैडल हासिल किया था। पहली बार कोई भारतीय बॉक्सर महिला यहाँ तक पहुंची थी।

जीवन से जुड़ी विशेष जानकारी, समर्पण सहित आगामी विचार व्यवस्था –

पूरा नाम मांगते चुंगनेजंग मेरी कोम
जन्म 1 मार्च 1983
जन्म स्थान कन्गथेइ, मणिपुरी, भारत
माता-पिता मांगते अक्हम कोम – मांगते तोंपा कोम
पति करुँग ओंखोलर कोम
उम्र40(2022)
कोच गोपाल देवांग, एम् नरजीत सिंह, चार्ल्स अत्किनसन, रोंगमी जोसिया
प्रोफेशन बॉक्सिंग
हाईट 1.58 m
वजन 51 kg

मैरी कॉम का प्रारंभिक जीवन

वर्ल्ड बॉक्सर चैम्पियन मैरी कॉम 1 मार्च, 1983 को भारत के मणिपुर के कन्गथेई में एक आर्थिक रुप से कमजोर और बेहद गरीब परिवार में जन्मी थीं। वे मांगते चुंगनेजंग मैरी कॉम के रुप में पैदा हुईं थीं।

मेरी कॉम की शिक्षा

मैरी कॉम का परिवार एक गरीब परिवार था तो ऐसे हालत नहीं थे की हाई एजुकेशन की पढाई की जा सके। फिर भी उनके परिवार ने उनको पढ़ाया और उनकी प्रारंभिक पढाई मणिपुर के ही लोकटक क्रिस्चियन मॉडल स्कूल में पूरी हुयी थी मेरी कॉम पढाई में अच्छी नहीं थी। लेकिन फिर भी इन्होने आगे की पढाई के लिए इम्फाल के आदिमजाति स्कूल में एडमिशन ले लिए था लेकिन वो परीक्षा को पास नहीं कर पाई और वहा से स्कूल को छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओपन स्कूल से अपनी हाई स्कूल की पढाई पूरी की थी।

उस टाइम महिलाओ को इतना आर्थिक और सामाजिक छूट नहीं मिली थी की वो सब कुछ खुद हैंडल कर सकते है। और मेरी कॉम के परिवार की आर्थिक हालत भी ठीक नहीं थी इसलिए उनका भी सहयोग भी करना पड़ता था।

मैरी कॉम का पारिवारिक जीवन

मैरी कॉम का विवाह ओन्लेर कॉम से 2005 में हुआ। उनकी ओन्लेर से मुलाकात सन 2001 में दिल्ली में हुई जब वो राष्ट्रिय खेलों में भाग लेने पंजाब जा रही थीं। कॉम दंपत्ति के 3 बच्चे हैं।

वह जानवरों के अधिकारों और रक्षा के मुद्दों से भी जुड़ी हैं। उन्होंने सर्कसों में हाथियों के प्रयोग पर रोक लगाने की मांग की है। उनके अनुसार सर्कसों में जानवरों से क्रूरतापूर्ण व्यवहार किया जाता है जिसे रोका जाना चाहिए। वो जानवरों की रक्षा से जुड़ी संस्था PETA से जुड़ी हैं और उनकी मुहीम ‘कम्पैसनेट सिटीजन’ का जोरदार समर्थन किया है। इसके तहत उन्होंने सारे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों को विद्यालयों के पाठ्यक्रम में इस तरह के पाठ रखने की गुजारिश की है।

मेरी कॉम का करियर

  • मैरी कॉम का बचपन से ही एथ्लेटिक्स में जाने का सपना था, उनके मन में बॉक्सिंग के प्रति आकर्षण रहा है। उन्होंने 1999 में खुमान लम्पक स्पो‌र्ट्स कॉम्प्लेक्स में कुछ लड़कियों को बॉक्सिंग रिंग में लड़कों के साथ बॉक्सिंग के दांव-पेंच आजमाते देखा, तभी से उन्होंने इस खेल में जाने के बारे में सोच लिया था।
  • मेरी ने अपने बॉक्सिंग करियर की शुरुवात 18 साल की उम्र में ही कर दी थी, जिसके बाद समस्त भारत के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनकर उभरी थी। इनका कॅरियर काफी उतार चढ़ाव से भरा हुआ रहा है। बॉक्सिंग में करियर बनाने के लिए कड़ी मेहनत की और अपने परिवार तक से लड़ बैठी थी।
  • सन 1998 से 2000 तक वे अपने घर में बिना बताये बॉक्सिंग की ट्रेनिंग लेती रही। सन 2000 में जब मेरी ने ‘वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप, मणिपुर’ में जीत हासिल की, तब उन्हें इसके लिए बॉक्सर का अवार्ड मिला तो वहां के हर एक समाचार पत्र में उनकी जीत की बात छपी। उसके बाद परिवार को भी उनके बॉक्सर बनने के बारे में पता चला था।
  • उन्होंने पश्चिम बंगाल में आयोजित ‘वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप’ में गोल्ड मैडल जीत कर अपने राज्य का नाम रोशन किया।
  • सन 2001 में अन्तराष्ट्रीय स्तर पर अपना करियर शुरू किया, उस समय उनकी उम्र मात्र 18 साल मात्र थी। सर्वप्रथम उन्होंने अमेरिका में आयोजित AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप, में 48 kg वेट केटेगरी में हिस्सा लिया, जहां से उन्हें सिल्वर मैडल प्राप्त हुआ।
  • 2002 में तुर्की में आयोजित AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप में भी मेरी विजयी रहीं, जहां से गोल्ड मैडल जीतकर आयी थी।
  • सन 2003 में भारत में आयोजित ‘एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप’ में 46 kg वेट केटेगरी भी मैरी कॉम ने गोल्ड मैडल जीता।
  • 2005 में जब ताइवान में ‘एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप’ 46 kg वेट क्लास का आयोजन किया गया तब फिर से उन्होंने गोल्ड मैडल जीतकर अपने देश का नाम रोशन किया।
  • उसके बाद सन 2006 में AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप, डेनमार्क में आयोजित ‘वीनस वीमेन बॉक्स कप’ एवं भारत में आयोजित AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप, 2008 में भारत में आयोजित एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप एशियन में इनके द्वारा सिल्वर मैडल जीता गया।
  • 2010 में कजाखस्तान में आयोजित ‘एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप’ में मेरी ने गोल्ड मैडल जीता और इसके साथ ही वह लगातार पाचंवी बार AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप में गोल्ड मैडल जितने वाली पहली भारतीय महिला बन गयी थी।
  • जब 2010 में भारत में कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन किया गया, तब ओपनिंग सेरेमनी में विजेंदर सिंह के साथ मैरी कॉम का नाम भी था। इस गेम्स में वीमेन बॉक्सिंग गेम का आयोजन नहीं था, जिसके कारण वह इसमें हिस्सा नहीं ले पायी थी।
  • 2011 में चाइना में आयोजित ‘एशियन वीमेन कप में गोल्ड मैडल जीता।
  • 2012 में मोंगोलिया में आयोजित ‘एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप’ 51 kg वेट में भाग लेकर उन्होंने वहां से भी गोल्ड मैडल जीता।
  • इसके बाद उन्होंने 2014 में होने वाले साउथ कोरिया में आयोजित एशियन गेम्स में वीमेन फ्लाईवेट (48-52kg) में भाग लेकर गोल्ड मैडल जीतकर इतिहास रच दिया। इस तरह से उन्होंने अपने जीवन में कई गोल्ड मेडल अपने नाम किये और दुनियाभर में अपना व अपने देश का नाम रोशन किया है। यह सब उन्होंने बहुत ही कम उम्र में प्राप्त किया।

मैरी कॉम को आठ बार विश्व चैम्पियनशिप में मेडल लाने पर उन्हें ‘मैग्निफिसेंट मैरी’ का नाम दिया गया।

मेरी कॉम बॉक्सिंग ट्रेनिंग

मेरी ने मन में ठान लिया था कि वे अपने लक्ष्य तक जरुर पहुंचेंगी, चाहे इसके लिए उन्हें कुछ भी क्यों न करना पड़े। मेरी ने अपने माँ बाप को बिना बताये इसके लिए ट्रेनिंग शुरू कर दी। एक बार इन्होने ‘खुमान लम्पक स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स’ में लड़कियों को लड़कों से बॉक्सिंग करते देखा, जिसे देख वे स्तब्ध रे गई। यहाँ से उनके मन में उनके सपने को लेकर विचार और परिपक्व हो गए। वे अपने गाँव से इम्फाल गई और मणिपुर राज्य के बॉक्सिंग कोच एम् नरजीत सिंह से मिली और उन्हें ट्रेनिंग देने के लिए निवेदन किया। वे इस खेल के प्रति बहुत भावुक थी, साथ वे एक जल्दी सिखने वाली विद्यार्थी थी. ट्रेनिंग सेंटर से जब सब चले जाते थे, तब भी वे देर रात तक प्रैक्टिस करती रहती थी।

मेरी कॉम के कोच

मेरी कॉम के ट्रेनिंग तीन कोच के द्वारा हुई है। इनके नाम है इबोम्चा, नरजीत एंव किशन। मेरी कॉम की बचपन से ही खेलो में रूची रही है। इसलिए खेलो में उनकी पकड़ ज्यादा रही है। उन्होंने मुक्केबाजी के खेल की बारीकियां बहुत ही जल्दी सिख ली थी। और उन्होंने इसके लिए काफी मेहनत की। देर रात तक वो इसकी प्रैक्टिस करती थी।

मेरी कॉम बिना अपने घरवालों को बताये इस खेल की ट्रेनिंग कर रही थी। इसलिए उनके इस खेल की खबर उनके परिवार को न्यूज़ पेपर से मिली थी। जब उन्होंने 2000 में महिला मुक्केबाजी प्रतियोगिता में जित हासिल की थी। तीन साल लगातार कड़ी ट्रेनिंग के बाद उनकी मेहनत का नतीजा उनके सामने था। उनके नाम की खबरे अख़बार में आ चुकी थी। इसके बाद उन्होंने वेस्ट बंगाल में महिला मुक्केबाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था। और अपने राज्य का नाम रोशन किया था।

टोक्यो ओलंपिक 2021

मैरी कॉम ने साल 2021 में हुए टोक्यो ओलंपिक में भी हिस्सा लिया, लेकिन प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में हार के साथ ही उनका सफ़र खत्म हो गया। हालांकि मैच के बाद मैरी कॉम ने जजों के फैसले पर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि, ‘मुझे लगा कि मैं जीत गई हूँ, लेकिन जज के स्कोर से हैरान हूँ। उम्मीद है दुनिया ने सच देखा होगा।’

मैरी कॉम के सम्मान और पुरस्कार

  • भारत सरकार ने वर्ष 2003 में मैरी कॉम को अर्जुन पुरस्कार से नवाजा एवं वर्ष 2006 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
  • 29 जुलाई, 2009 को वे भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए मुक्केबाज़ विजेंदर कुमार तथा पहलवान सुशील कुमार के साथ संयुक्त रूप से चुनीं गयीं।
  • इसके अलावा वर्ष 2013 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
  • मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्त्रीत्व को नई परिभाषा देकर अपने शौर्य बल से नए प्रतिमान गढ़ने वाली विश्व प्रसिद्ध मुक्केबाज श्रीमती एमसी मैरी कॉम 17 जून 2018 को वीरांगना सम्मान से विभूषित किया गया।
  • उन्होंने 2019 के प्रेसिडेंसीयल कप इोंडोनेशिया में 51 किग्रा भार वर्ग में यह स्वर्ण पदक जीता।
  • नई दिल्ली में आयोजित 10 वीं एआईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप 24 नवंबर, 2018 को उन्होंने 6 विश्व चैंपियनशिप जीतने वाली पहली महिला बनकर इतिहास बनाया।

मेरी कॉम की प्रमुख उपलब्धियाँ

  • 2001 में एआईबीए व‌र्ल्ड वुमन्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
  • 2002 में एआईबीए व‌र्ल्ड वुमन्स सीनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
  • साल 2002 में उन्होंने हंगरी में विच कप में 45 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।
  • 2003 में एशियन वुमन्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया।
  • 2004 में ताईवान में आयोजित एशियन वुमन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
  • 2005 में एआईबीए वुमन्स व‌र्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
  • 2006 में एआईबीए व‌र्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
  • 2008 में चीन में आयोजित व‌र्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
  • 2010 में एआईबीए व‌र्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
  • 2010 एशियाई खेलों में कांस्य पदक।
  • 2012 लंदन ओलम्पिक में कांस्य पदक।
  • 2014 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक।

मैरी कॉम की कुल संपत्ति (2022)

एक रिपोर्ट के अनुसार, ओलंपिक के बाद मैरी कॉम की कमाई 3.32 करोड़ रुपये के करीब आंकी गई थी, जिसमें मणिपुर और राजस्थान राज्य सरकारें दोनों ओलंपिक कांस्य पदक विजेता के लिए 50 लाख रुपये की पेशकश कर रही थीं। उनकी अधिकांश आय टूर्नामेंट की कमाई और ब्रांड एंडोर्समेंट से थी। डीएनए के मुताबिक, उन्हें 25 की प्रियंका-स्टारर बायोपिक ‘मैरी कॉम’ के लिए 2014 लाख रुपये का भुगतान किया गया था।

हाल ही में, कॉम को ब्रांड एंबेसडर के रूप में नामित किया गया था बीएसएनएल दो साल के लिए।

मैरी कॉम के जीवन पर आधारित किताब

मैरी कॉम के प्रेरणादायक जीवन पर उनकी आत्मकथा “Unbreakable” के नाम से साल 2013 में प्रकाशित की जा चुकी है। इस किताब को प्रसिद्ध बॉक्सर मैरी कॉम ने डीनो सरटो के साथ लिखा है।

मैरी कॉम के जीवन पर आधारित फिल्म

विश्व की महान मुक्केबाज मैरी कॉम के महान जीवन पर आधारित फिल्म “मेरी कॉम” साल 2014 में रिलीज हुई थी। ओमंग कुमार के निर्देशन पर बनी यह फिल्म साल 2014 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में बॉलीवुड और हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने मैरी कॉम का शानदार किरदार निभाया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर काफी हिट रही थी। मैरीकॉम पर बनी इस फिल्म को काफी बड़े स्तर पर सराहना भी मिली थी।

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