Vijay Diwas 2021: पाकिस्तान पर जीत के 50 साल पूरे, नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचे पीएम मोदी, 1971 युद्ध के शहीदों को दी श्रद्धांजलि

Nation Observes 49th Vijay Diwas on 16 December 2020

विजय दिवस भारत में हर साल 16 दिसंबर को 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान पर देश की जीत को लेकर मनाया जाता है. इसी युद्ध में भारत की जीत के बाद बांग्लादेश बना था. इस साल देश 50वां विजय दिवस मनाया जा रहा है.

साल 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध 3 दिसंबर को शुरू हुआ और 13 दिनों तक चला. युद्ध आधिकारिक तौर पर 16 दिसंबर को समाप्त हुआ. 16 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल नियाजी के कुल 93,000 सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.

यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अब तक का सबसे बड़ा सैन्य आत्मसमर्पण भी था. आज के दिन को ‘बांग्लादेश मुक्ति दिवस’ भी कहा जाता है और यह पाकिस्तान से बांग्लादेश की आधिकारिक स्वतंत्रता का प्रतीक है. 1971 के युद्ध के दौरान तकरीबन 3900 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे और 9851 सैनिक घायल हो गए थे.

भारत के कुछ शहरों में 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी विमानों ने बमबारी शुरू कर दी पश्चिम पाकिस्तान ने 1971 के युद्ध से पहले के कुछ महीनों में पूर्वी पाकिस्तान की सड़कें चीखों से गूंजा दिए और ख़ून से रंग दिए. पाकिस्तानी सेना ने जो किया उसकी तुलना हिटलर के होलोकॉस्ट से की जाती है.

मार्च 1971 में पाकिस्तानी सेना ने पूर्वी पाकिस्तान से देशभक्ति, भाषा भक्ति को निकाल बाहर करने की ठान ली. ऑपरेशन सर्चलाइट चलाया गया और बंगाली राष्ट्रवादियों की बेरहमी से हत्या शुरु कर दी गई. ग़ौतरलब है कि बांग्लादेश की आज़ादी में महिलाओं और पुरुषों दोनों ने ही संघर्ष किया.

बांग्लादेश में मुक्ति बाहिनी अपने तरीके से लड़ाई लड़ रही थी. कॉलेज के युवक-युवतियां, आम लोग सभी आज़ादी के लिए लड़ रहे थे, संघर्ष कर रहे थे. बांग्लादेश लिब्रेशन वॉर के दौरान भारत ने बांग्लादेश की राशन भेजकर, सेना भेजकर सहायता की. युद्ध के दौरान ही हज़ारों की संख्या में बांग्लादेशियों ने भारत में शरण ली.

4 दिसंबर, 1971 को ऑपरेशन ट्राईडेंट भारत ने शुरू किया. इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना ने बंगाल की खाड़ी में समुद्र की और से पाकिस्तानी नौसेना को टक्कर दी और दूसरी तरफ पश्चिमी पाकिस्तान की सेना का भी मुकाबला किया.

3 दिसंबर को जब पाकिस्तान एयर फ़ोर्स ने भारत के 11 एयर फ़ोर्स बेस पर हमला शुरु किया तब युद्ध का उद्घोष हुआ.

इस साल भारत स्वर्णिम विजय दिवस मना रहा है. इसी के साथ बांग्लादेश की आज़ादी को भी 50 साल पूरे हो गए. पाकिस्तानी सेना की हैवानियत को बांग्लादेश की जनता नहीं भूल सकती लेकिन बांग्लादेश लिब्रेशन वॉर क्रांति और गणतंत्र का उत्कृष्ट उदाहरण है.

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार (16 दिसंबर) को 1971 के युद्ध के दौरान सशस्त्र बलों के साहस और बलिदान को याद किया और इसे स्वर्णिम विजय दिवस के अवसर पर ‘भारत के सैन्य इतिहास का स्वर्णिम अध्याय’ बताया.

पीएम मोदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर 1971 युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी.

1971 युद्ध के स्वर्णिम विजय पर्व के मौके पर पीएम मोदी गुरुवार को नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचे जहां उन्होंने 1971 युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी. पीएम मोदी ने यहां स्वर्णिम विजय मशालों के स्वागत और सम्मान समरोह में भाग लेते हुए जंग में शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी. प्रधानमंत्री के साथ देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे.

पीएम मोदी ने पिछले साल इसी दिन चार स्वर्णिम विजय मशालों को प्रज्वलित किया था. PMO से मिली जानकारी के मुताबिक, इन मशालों को देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाया गया.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मौके लिखा कि भारतीय सेना के अनुशासन, अदम्य साहस एवं अद्भुत पराक्रम की ऐतिहासिक उपलब्धि है- ‘विजय दिवस’. वर्ष 1971 के युद्ध में अपने अप्रतिम शौर्य से मानवता को गौरवभूषित करते हुए माँ भारती के मस्तक पर विजय का तिलक लगाने वाले सभी वीरों को कोटिशः नमन. जय हिंद!


मशालों को एक ज्वाला के तौर पर विलय किया जाएगा

श्रद्धांजलि समारोह के दौरान मशालों को एक ज्वाला के तौर पर विलय किया जाएगा.

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