AccuWeather: Local, National, & Global Daily Weather Forecast ( मौसम )

मौसम

मौसम क्या होता है ?

मौसम वातावरण की स्थिति को कहते है, और इसे समझाने के लिए कि डिग्री का प्रयोग किया जाता है जिससे कि मौसम गर्म है या ठंडा, गीला है या सूखा, शांत है या तूफानी, स्पष्ट है या बादल है, इसका पता लगाया जा सके। अधिकांश मौसम की घटनाएं समताप मंडल के ठीक नीचे वायुमंडल के सबसे निचले स्तर में क्षोभमंडल में होती हैं।

मौसम के प्रकार

  • बसंत ऋतु (चैत्र-बैशाख या मार्च-अप्रैल)
  • ग्रीष्म ऋतु (ज्येष्ठ-आषाढ़ या मई-जून)
  • वर्षा ऋतु (श्रावण-भाद्रपद या जुलाई-अगस्त)
  • शरद ऋतु (आश्विन- कार्तिक या सितम्बर-अक्टूबर)
  • हेंमत ऋतु (अगहन-पौष या नवम्बर-दिसम्बर)
  • शिशिर ऋतु (माघ-फाल्गुन या जनवरी-फरवरी)

मौसम के विभिन्न तत्व

तापमान (temperature)

तापमान मौसम का सर्वप्रथम तत्त्व है जिसमें पृथ्वी पर सर्वत्र विभिन्नताएँ मिलती हैं। पर्यावरण पर भी मौसम का प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है। वर्तमान समय में तीव्र औद्योगीकरण के कारण पृथ्वी के तापमान में वृद्धि से ग्लोबल वार्मिंग की विकट समस्या उत्पन्न हो रही है जिससे मौसम में भी अधिक तीव्रता से परिवर्तन अनुभव किया जा रहा है।

आर्द्रता(huminity)

वायुमण्डलीय नमी को आर्द्रता कहते हैं। जैसे-जैसे पृथ्वी के धरातल से वाष्प की दूरी बढ़ती जाती है वैसे-वैसे वायु में जल (नमी) की मात्रा कम होती जाती है। वायुमण्डलीय आर्द्रता को तापमान सबसे अधिक प्रभावित करने वाला तत्त्व है जिस स्थान पर तापमान उच्च होता है सामान्यत: वहाँ वायु की नमी तेजी से कम हो जाती है।

वायु की गति और दिशा ( wind speed and direction)

मौसम पर वायु की गति और दिशा दोनों अपना प्रभाव डालती हैं। प्राय: वायु उच्च दाब वाले स्थानों से निम्न दाब वाले स्थानों की ओर बढ़ती है। वायु के बहने की कुछ निश्चित दिशाएँ हैं; जैसे-वर्षा ऋतु में पूर्वी तथा गर्मियों में पश्चिमी हवाएँ बहती हैं। ये हवाएँ जैसे स्थान से होकर बहती हैं।इनमें वैसे ही परिवर्तन होते रहते हैं।

वायुदाब ( Air pressure )

वायु में भार होता है, इसलिए वह दबाव डालती है। किसी स्थान पर वायु का दाब उस स्थान की समुद्र तल से ऊँचाई पर निर्भर करता है। कोई स्थान समुद्र तल से जितना ऊँचा होगा वहाँ वायु का दाब उतना ही कम होगा। वायुमण्डलीय (atmospheric) दाब का कम या अधिक होना वायु तापमान व उसमें नमी की मात्रा पर निर्भर करता है। इस कारण मौसम में परिवर्तन अनुभव किया जाता है।

वर्षा की मात्रा ( amount of air)

किसी स्थान पर वर्षा की मात्रा तापमान, वायु की दिशा और वायुदाब दशाओं से अधिक प्रभावित होती है। मौसम पर वर्षा की मात्रा का विशेष प्रभाव पड़ता है क्योंकि बारिश (rain) की मात्रा climate यानि मौसम की अन्य दशाओं और स्थानीय पर्यावरण (envelopment) दोनों को प्रभावित करती है। ।

बादल ( cloud)

वायु में भाप का सबसे व्यापक रूप बादल है। बादल की दशाएँ वायु की दिशा एवं वायु दाब से प्रभावित होकर वर्षा और तापमान को प्रभावित करके मौसम को प्रभावित करती हैं। मौसम के उपर्युक्त तत्त्व ऐसे तत्त्व हैं जो मौसम और जलवायु को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं।

ये तत्त्व पर्यावरण की विभिन्न दशाओं और मौसम अन्य गौण तत्त्व; जैसे – ओस, ओला और कोहरा आदि की दशाओं को उत्पन्न करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।अत : मौसम के विभिन्न तत्त्वों में तापमान, वायु की नमी , वायु की गति एवं दिशा, वायुदाब, बादल और वर्षा की मात्रा का महत्त्वपूर्ण स्थान है। ये सभी तत्त्व मिलकर किसी स्थान के मौसम को तो प्रभावित करते ही हैं वहाँ के वातावरण की दशाओं के लिए भी महत्त्वपूर्ण होते हैं।

मौसम का कारण

मौसम इसलिए होता है क्योंकि पृथ्वी के विभिन्न हिस्सों को सूर्य से अलग-अलग मात्रा में गर्मी मिलती है। जिससे यह विभिन्न जलवायु बनाता है। उष्ण कटिबंधों को सबसे अधिक गर्मी इसलिए मिलती है क्योंकि सूर्य उन पर सीधा चमकता है, जबकि ध्रुवों को सबसे कम गर्मी मिलती है क्योंकि सूर्य उन पर कम कोण से चमकता है। गर्म हवा ठंडी हवा की तुलना में हल्की होती है और संवहन द्वारा आकाश में ऊपर उठती है। हवा में हमेशा कुछ न कुछ पानी मिला रहता है। इसे नमी कहते हैं। जब यह ठंडा हो जाता है, तो पानी संक्षेपण के माध्यम से गैस से तरल में बदल सकता है। तब पानी आसमान से बारिश या बर्फ के रूप में गिर सकता है। हवा के ऊपर उठने के बाद, यह ठंडी हो जाती है और वापस जमीन की ओर चली जाती है। क्योंकि हवा ने अपना पानी पहले खो दिया है, जमीन पर वापस आने पर यह सूख जाती है। जब भिन्न-भिन्न तापमानों के दो वायुराशियों का मिलन होता है, तो इसे उष्ण वाताग्र या ठण्डा वाताग्र कहते हैं। जिस तरह से हवा पृथ्वी के चारों ओर घूमती है उसे वायुमंडलीय परिसंचरण कहा जाता है।

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